स्टेबलकॉइन क्या है?
स्टेबलकॉइन ऐसी क्रिप्टोकरेंसी हैं जो अपनी वैल्यू स्थिर रखने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।
स्टेबलकॉइन को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे (मज़बूत) फिएट करेंसी की कीमत स्थिरता का फ़ायदा उठा सकें और साथ ही डिजिटल एसेट ट्रांज़ैक्शन की सुरक्षा, रफ़्तार और कम लागत भी बनी रहे। शुरुआत में इन्हें क्रिप्टो ट्रेडिंग में कीमतों के उतार-चढ़ाव को कम करने, रोज़मर्रा के खर्च को आसान बनाने और वित्तीय संस्थानों से पुल जोड़ने के लिए बनाया गया था। अब ये पेमेंट की लागत और झंझट घटाने के लिए आम बैंकिंग ऐप्स में भी जगह बनाने लगी हैं।
स्टेबलकॉइन मुख्य रूप से चार तरह के होते हैं। पहले तीन मॉडल ऐसे स्टेबलकॉइन बनाते हैं जिनके पीछे फिएट करेंसी, कमोडिटी या दूसरी क्रिप्टोकरेंसी का समर्थन होता है। चौथा विकल्प है विकेंद्रीकृत स्टेबलकॉइन, जो अपनी वैल्यू बनाए रखने के लिए अपने आप एल्गोरिदम और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर रहते हैं।
क्या स्टेबलकॉइन विवादित हैं?
बैंकर और कंपनियों के अधिकारी जहाँ स्टेबलकॉइन को उपयोगी औज़ार मानते हैं, वहीं नियामक इस बात से सतर्क हैं कि कुछ टोकन राष्ट्रीय मुद्राओं को टक्कर दे सकते हैं।
जवाब इस पर निर्भर करता है कि इनका इस्तेमाल कैसे और कौन कर रहा है। जून 2019 में फ़ेसबुक ने Libra नाम से स्टेबलकॉइन प्रोजेक्ट शुरू किया और ऊपर मंडराते काले बादल छाँटने के लिए बाद में इसका नाम बदलकर Diem कर दिया। सोच यह थी कि राष्ट्रीय मुद्राओं से समर्थित एक ऐसा स्टेबलकॉइन बने, जिससे सोशल नेटवर्क के 2.3 अरब सदस्य भुगतान कर सकें।
चंद दिनों में ही ज़बरदस्त हलचल मचा देने वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर सिर्फ़ सतर्क रहने के बजाय अधिकारियों ने सख़्त नियमन के लिए कमर कस ली। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों, नियामकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने Libra को राष्ट्रीय संप्रभुता और वैश्विक वित्त की स्थिरता के लिए ख़तरा बताया। इसके बाद वित्तीय प्रलय की अफ़वाहें और नाराज़ बयान आते रहे। प्रोजेक्ट रद्द कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश हुई। बड़ी बाधाओं के बावजूद प्रोजेक्ट जारी है।
दूसरी ओर, जनवरी 2021 में अमेरिका के कार्यवाहक करेंसी कंट्रोलर ब्रायन ब्रूक्स ने बैंकों को भुगतान आसान बनाने के लिए नोड चलाकर स्टेबलकॉइन नेटवर्क इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी, जबकि यूरोपीय संघ क्रिप्टोकरेंसी के लिए व्यापक नियामक ढाँचे पर काम करते हुए ख़ास स्टेबलकॉइन को लेकर अलग गाइड प्रकाशित कर रहा था।
यानी सवाल यह है: क्या बात एक ऐसे स्टेबलकॉइन की है जिसकी कमान एक भरोसे के लायक न समझे जाने वाले दबदबे वाले सोशल नेटवर्क के हाथ में है और जो राष्ट्रीय मुद्राओं को कमज़ोर और तबाह करने की क्षमता वाला वैश्विक स्टेबलकॉइन बनाना चाहता दिखता है? या उन स्टेबलकॉइन की, जिन्हें ऐसे बैंक इस्तेमाल करते हैं जो मौजूदा वित्तीय व्यवस्था बदलना ही नहीं चाहते?
फिएट-समर्थित स्टेबलकॉइन क्या है?
फिएट-समर्थित स्टेबलकॉइन हर सिक्के के पीछे एक-के-बदले-एक फिएट करेंसी रखकर अपनी कीमत स्थिर बनाए रखता है।
स्टेबलकॉइन के पहले और सबसे सरल मॉडल ख़ास तौर पर अमेरिकी डॉलर, यूरो, येन और ऐसी ही मुद्राओं के साथ एक-के-बदले-एक अनुपात में लागू किए गए। जब तक आधार मुद्रा (या मुद्राओं की वह टोकरी जो Libra ने शुरुआत में प्रस्तावित की थी) स्थिर रहती है, स्टेबलकॉइन अपनी वैल्यू बनाए रखेगा। मूल रूप से इनके पीछे फिएट जारी करने वाले की "पूरी साख और भरोसा" होता है — वही वैल्यू जिसका बचाव उस देश का केंद्रीय बैंक करता है।
इनमें सबसे बड़ा Tether था, जिसका मार्केट कैप यह लेख लिखे जाने के समय 62.2 अरब डॉलर था। लेकिन दूसरे प्रमुख स्टेबलकॉइन में Circle और Coinbase का USD Coin (23 अरब डॉलर), Binance USD (9.6 अरब डॉलर) और DAI (4.8 अरब डॉलर) शामिल हैं।
Tether पहले दिन से दावा करता रहा कि वह एक-के-बदले-एक आधार पर 100 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर से समर्थित है। न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल द्वारा Tether पर मुकदमा दायर करने के बाद सामने आया कि इस रकम का 26 प्रतिशत उसकी सहयोगी कंपनी, Bitfinex एक्सचेंज, से लिया गया कर्ज़ का वादा-पत्र था। हाल ही में Tether ने बताया कि उसके "कैश रिज़र्व" में असल नकदी करीब 3 प्रतिशत ही है।
एसेट-समर्थित स्टेबलकॉइन क्या है?
एसेट-समर्थित स्टेबलकॉइन फिएट-समर्थित मॉडल जैसा ही है, बस यह सोने जैसी भौतिक संपत्तियों पर टिका होता है।
कमोडिटी-समर्थित स्टेबलकॉइन के पीछे फिएट करेंसी की जगह कई तरह की ठोस गिरवी होती है — सबसे पहले सोना, यानी वैल्यू सहेजने का पारंपरिक ज़रिया। ये कीमती धातुओं की टोकरी या स्विस रियल एस्टेट तक से समर्थित हो सकते हैं। आम तौर पर ऐसे स्टेबलकॉइन कमोडिटी की एक तय मात्रा से जुड़े होते हैं, जिसे किसी आधिकारिक जगह पर रखा जाता है और जिसकी बार-बार जाँच होती है। दूसरी ओर फिएट स्टेबलकॉइन Tether लंबे समय तक ऐसे ऑडिट से बचता रहा है।
Pax Gold, Paxos के सीईओ चार्ल्स कास्कारिला का बनाया ERC-20 टोकन, ब्रिटिश राजधानी में Brinks के LBMA-मान्यता प्राप्त गोल्ड वॉल्ट में रखे London Good Delivery सोने के एक औंस से समर्थित है। इसे कीमती धातु के बदले भुनाया जा सकता है। वहीं Digix Gold एक ग्राम 99.99 प्रतिशत शुद्ध सोने का प्रतिनिधित्व करता है, जो सिंगापुर में रखा जाता है और हर तिमाही जाँचा जाता है।
एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन क्या है?
बाकियों से ज़्यादा जटिल ये स्टेबलकॉइन सप्लाई बढ़ाकर या घटाकर कीमत स्थिर रखते हैं और अपनी वैल्यू बनाए रखने के लिए अपनी बाज़ार ताक़त का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए ये एल्गोरिदम और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का सहारा लेते हैं।
स्टेबलकॉइन का सबसे जटिल रूप वे एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन हैं जिनके पीछे कोई गिरवी नहीं होती। नाम से ही साफ़ है कि इनकी वैल्यू ख़ास एल्गोरिदम और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट तय करते हैं, जो बाज़ार में टोकन की सप्लाई अपने आप घटाते या बढ़ाते हैं ताकि टोकन की कीमत उस फिएट करेंसी के साथ जुड़ी रहे जिसे वह ट्रैक कर रहा है। जैसे ही बाज़ार भाव डॉलर, यूरो या जिस भी एसेट पर वह आधारित है, उससे नीचे गिरने लगता है, एल्गोरिदम टोकन को सर्कुलेशन से हटा देते हैं। अगर स्टेबलकॉइन की वैल्यू फिएट से ऊपर चली जाए, तो सिस्टम बाज़ार में नए स्टेबलकॉइन जोड़ देता है।
यानी मक़सद असल में एक ऐसा विकेंद्रीकृत और स्वचालित केंद्रीय बैंक खड़ा करना है, जो कीमत का स्तर बनाए रखने के लिए स्टेबलकॉइन की सप्लाई घटाता-बढ़ाता रहे।
क्रिप्टो-समर्थित स्टेबलकॉइन क्या है?
क्रिप्टो-समर्थित स्टेबलकॉइन अपनी वैल्यू स्थिर रखने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा गिरवी वाले कर्ज़ का इस्तेमाल करते हैं।
क्रिप्टो-कोलैटरल वाले स्टेबलकॉइन ऐसी टोकरियों से बनते हैं जिनमें एक या एक से ज़्यादा क्रिप्टोकरेंसी होती हैं। चूँकि इनकी कीमतें बहुत उतार-चढ़ाव वाली होती हैं, इसलिए गिरवी का स्तर काफ़ी ऊँचा रखा जाता है और ख़रीदारों को अपने कोलैटरल टोकन स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट में लॉक करने पड़ते हैं, जो कोलैटरल की वैल्यू बहुत ज़्यादा गिरने पर लिक्विडेट हो जाते हैं। यह वही गिरवी है जिसे स्टेबलकॉइन लौटाकर वापस लिया जा सकता है…
सबसे जाने-माने क्रिप्टो-समर्थित स्टेबलकॉइन में से एक है MakerDAO का DAI, जो 1 डॉलर से जुड़ा है। हालाँकि यह बेहद ज़रूरी है कि सिस्टम चरम हालात झेल सके — यह सबक MakerDAO को 12 मार्च 2020 की अपनी "ब्लैक स्वान" घटना में मिला, जब लिक्विडेशन की बाढ़ में ETH की वैल्यू 24 घंटे से भी कम समय में आधी रह गई और प्रोजेक्ट को गवर्नेंस तथा नीलामी प्रबंधन में बड़े बदलाव लागू करने पड़े। यह कोशिश कामयाब रही और लेख लिखे जाने के समय इस स्टेबलकॉइन का मार्केट कैप 4.8 अरब डॉलर से ज़्यादा है।
MakerDAO ने 12 मार्च 2020 की "ब्लैक स्वान" घटना से बड़ा सबक सीखा। भारी लिक्विडेशन के बाद ETH की वैल्यू 24 घंटे से भी कम समय में आधी रह गई थी, जिससे गवर्नेंस और नीलामी प्रबंधन में बदलाव लागू करना अनिवार्य हो गया, क्योंकि यह पक्का करना बेहद ज़रूरी है कि सिस्टम चरम हालात संभाल सके।
