विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) क्या है?

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क्रिप्टोकरेंसी आज खरबों डॉलर के उद्योग में बदल चुकी है और इसने पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में हलचल मचा दी है।

क्रिप्टोकरेंसी की जड़ में आविष्कारों का एक दिलचस्प इतिहास है, जो 1980 के दशक तक जाता है, जब क्रिप्टोग्राफी ने बड़ी छलांग लगाई थी। तब से कई घटनाओं ने क्रिप्टो की दुनिया को बदला है, और इनमें सबसे अहम रही पहली क्रिप्टोकरेंसी — बिटकॉइन। पिछले 12 वर्षों में तेज़ी से ऊपर चढ़ने के बावजूद बिटकॉइन पर आधारित वित्तीय सेवाएँ बहुत धीमी गति से आगे बढ़ीं, और इसकी मुख्य वजह रही इस करेंसी में स्थिरता और स्वीकार्यता की कमी। कीमत में भारी उतार-चढ़ाव के कारण मुख्यधारा के बैंक बिटकॉइन पर लोन स्वीकार नहीं करते — यही वजह है कि किसी भी निवेश की सही योजना बनाने के लिहाज़ से बिटकॉइन एक बेहद असुविधाजनक एसेट है।

क्रिप्टो की दुनिया में चीज़ें बहुत तेज़ी से बदलती हैं, और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) इस समय का सबसे बड़ा ट्रेंड है — इसमें कोई शक नहीं कि यह एक रोमांचक क्षेत्र है। अगर आप अब तक DeFi से परिचित नहीं हैं, तो चलिए थोड़ा गहराई में उतरकर इसे समझते हैं।

विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) क्या है

विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) एक व्यापक शब्द है, जिसमें पब्लिक ब्लॉकचेन पर बने ऐसे तमाम एप्लिकेशन और प्रोजेक्ट शामिल हैं जिनका मकसद मौजूदा वित्तीय दुनिया को बदल देना है। DeFi की परिभाषा है — ब्लॉकचेन तकनीक पर बने वित्तीय एप्लिकेशन, जो अक्सर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल करते हैं और जिनकी प्रेरणा सीधे ब्लॉकचेन तकनीक से आती है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ऐसे स्वचालित रूप से लागू होने वाले समझौते हैं, जिन तक इंटरनेट कनेक्शन वाला कोई भी व्यक्ति पहुँच सकता है और जिन्हें अमल में लाने के लिए किसी बिचौलिये की ज़रूरत नहीं पड़ती।

विकेंद्रीकृत ब्लॉकचेन नेटवर्क पर बने ऐसे एप्लिकेशन और पीयर-टू-पीयर प्रोटोकॉल, जिनमें बुनियादी उधार देने, उधार लेने या वित्तीय साधनों की अदला-बदली के लिए किसी अनुमति की ज़रूरत नहीं होती, उन्हें ही DeFi कहा जाता है। आज ज़्यादातर DeFi ऐप्स एथेरियम नेटवर्क पर बनते हैं, लेकिन कई दूसरे पब्लिक नेटवर्क भी विकसित हो रहे हैं जो बेहतर प्रदर्शन, स्केलेबिलिटी और सुरक्षा कम लागत पर देते हैं।

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के क्या फ़ायदे हैं?

ज़्यादातर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ट्यूरिंग कंप्लीट प्रोग्रामिंग भाषाओं पर आधारित होते हैं, जिनकी वजह से कई पक्ष बिना किसी केंद्रीकृत बिचौलिये के आपस में लेन-देन कर सकते हैं। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को चलाने की क्षमता के चलते ही ब्लॉकचेन वित्तीय एप्लिकेशन बनाने के लिए एक शानदार प्लेटफ़ॉर्म बन गया है।

DeFi की शुरुआत कैसे हुई?

शुरुआत में लोग वस्तुओं और सेवाओं की अदला-बदली करते थे। लेकिन जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ा, अर्थव्यवस्थाएँ भी विकसित हुईं: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार आसान बनाने के लिए हमने मुद्रा बनाई। मुद्रा ने नए आविष्कारों को जन्म दिया और अर्थव्यवस्था को ऊँचे स्तर तक पहुँचाया। हालाँकि, हर प्रगति की एक कीमत होती है।

इतिहास में हमारी अर्थव्यवस्था का आधार बनने वाली मुद्राएँ केंद्रीय सरकारें जारी करती रही हैं, और जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ता गया, उनका अधिकार भी बढ़ता गया। लेकिन यह भरोसा कई बार टूटा, जिससे लोग यह सवाल उठाने लगे कि क्या केंद्रीय सत्ताएँ वाकई पैसे को संभाल सकती हैं। DeFi की नींव इसी इरादे से रखी गई कि ऐसी वित्तीय व्यवस्था बने जो सबके लिए खुली हो और जिसमें किसी केंद्रीय सत्ता पर भरोसा करने और निर्भर रहने की ज़रूरत ही न पड़े।

कुछ लोग DeFi की शुरुआत 2009 में बिटकॉइन के आगमन से मानते हैं — ब्लॉकचेन नेटवर्क पर बनी पहली पीयर-टू-पीयर डिजिटल करेंसी। बिटकॉइन की बदौलत ही ब्लॉकचेन के ज़रिए पारंपरिक वित्तीय क्षेत्र में क्रांति लाने का विचार पुरानी वित्तीय संस्थाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में अगला अहम कदम बन गया। यह सब संभव हुआ 2015 में एथेरियम के आने से और ख़ासतौर पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट से। एथेरियम नेटवर्क दूसरी पीढ़ी का ब्लॉकचेन है और यह पहला नेटवर्क था जिसने वित्तीय उद्योग में इस तकनीक की क्षमता को पूरी तरह साकार किया। इसने कंपनियों और उद्यमों को DeFi से जुड़े प्रोजेक्ट बनाने और लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया, और इसी से DeFi का पूरा इकोसिस्टम बना।

DeFi ने ऐसी पारदर्शी और मज़बूत वित्तीय व्यवस्था बनाने के कई रास्ते खोले, जिस पर किसी एक संस्था का नियंत्रण न हो। हालाँकि वित्तीय एप्लिकेशन के लिए असली मोड़ 2017 में आया, जब ऐसे प्रोजेक्ट सामने आए जो सिर्फ़ पैसे भेजने से कहीं ज़्यादा कर सकते थे।

केंद्रीकृत वित्त की दिक्कतें

वित्तीय बाज़ार शानदार नवाचारों को जगह दे सकते हैं और समाज में समृद्धि ला सकते हैं। फिर भी इन बाज़ारों में सत्ता कुछ ही हाथों में सिमटी होती है। जब उपभोक्ता मौजूदा वित्तीय व्यवस्था में हिस्सा लेते हैं, तो वे अपनी संपत्ति बैंकों और वित्तीय संस्थानों जैसे बिचौलियों को सौंप देते हैं, जिससे जोखिम और नियंत्रण दोनों इन व्यवस्थाओं के केंद्र में ही बने रहते हैं।

इतिहास गवाह है कि बैंकर और संस्थाएँ बाज़ार के ख़तरों को पहचानने में नाकाम रही हैं, जैसा 2008 के वित्तीय संकट में दिखा। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब पैसे को केंद्रीय सत्ताएँ संभालती हैं, तो जोखिम केंद्र में जमा होता जाता है और पूरी व्यवस्था को ख़तरे में डाल देता है।

बिटकॉइन और शुरुआती दौर की दूसरी क्रिप्टोकरेंसी, जिन्हें लोगों को अपनी संपत्ति पर पूरा मालिकाना हक़ देने के लिए बनाया गया था, सिर्फ़ जारी करने और रखने के मामले में विकेंद्रीकृत थीं। जब तक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट नहीं आए, जिन्होंने DeFi को संभव बनाया, तब तक वित्तीय साधनों की व्यापक रेंज तक पहुँच नामुमकिन बनी रही।

DeFi प्रोटोकॉल और उनका काम करने का तरीका

DeFi अब ऐसे ऐप्स और प्रोटोकॉल का पूरी तरह काम करता इकोसिस्टम बन चुका है, जो करोड़ों उपयोगकर्ताओं को असली फ़ायदा देता है। DeFi इकोसिस्टम में पहले ही 30 अरब डॉलर से ज़्यादा की संपत्ति मौजूद है, जो इसे पब्लिक ब्लॉकचेन की दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते हिस्सों में शामिल करती है।

इस समय बाज़ार में मौजूद सबसे आम DeFi इस्तेमाल और प्रोटोकॉल पर एक नज़र:

DeFi में उधार देना और उधार लेना

उधार देने और उधार लेने को संभव बनाकर DeFi ने वित्त को एक नई दिशा दी। विकेंद्रीकृत लेंडिंग, जिसे अक्सर "ओपन फाइनेंस" भी कहा जाता है, क्रिप्टो रखने वालों को अपनी होल्डिंग उधार देकर सालाना रिटर्न कमाने का मौका देती है। वहीं विकेंद्रीकृत बॉरोइंग की बदौलत लोग तय ब्याज दर पर पैसा उधार ले सकते हैं। उधार देने और लेने का मकसद बिटकॉइन समुदाय की ज़रूरतें पूरी करना और साथ ही वित्तीय क्षेत्र के इस्तेमाल के तरीक़ों को भी सँभालना है।

DeFi का भविष्य

डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर तकनीक में हो रहे नवाचार की वजह से हम पैसे के नए कामकाज में एक बड़ी छलांग देख रहे हैं। इतिहास में पहली बार, दुनिया भर के लोगों के लिए बनी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को ख़ुद वही लोग आकार दे रहे हैं।

DeFi प्रोटोकॉल के संचालन में हिस्सा लेने और उस मेज़ पर बैठने के लिए हर कोई स्वागत योग्य है, जहाँ विकेंद्रीकृत वित्त की दुनिया इसी वक़्त गढ़ी जा रही है।

DeFi का क्षेत्र धीरे-धीरे पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था के करीब पहुँच रहा है, और नवाचार की सबसे आगे की कतार में काम करने की कुछ चुनौतियों के बावजूद विकेंद्रीकृत वित्त की दुनिया लगातार ऊपर जा रही है। जैसे-जैसे वित्तीय सेवाएँ बनाने की क्षमता और लोकतांत्रिक होती जाएगी, यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि यह क्षेत्र समय के साथ किस दिशा में जाएगा। लेकिन जिस पल DeFi और फिनटेक आपस में मिलेंगे और एक हो जाएँगे, हम उस मोड़ पर पहुँचेंगे जहाँ अभी शैशव अवस्था में मौजूद यह वित्तीय तकनीक एक नई वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बन जाएगी। ऐसी व्यवस्था, जो तेज़, सुरक्षित, सबकी पहुँच में और सबके लिए बराबर होने का लक्ष्य सचमुच पूरा करती हो।