टेक्निकल एनालिसिस के 5 प्रमुख इंडिकेटर

· 5 min read

संक्षेप में (TL;DR)

इंडिकेटर अनुभवी टेक्निकल एनालिस्ट का हथियार होते हैं। हर खिलाड़ी वह टूल चुनता है जो उसकी अपनी खेल-शैली के सबसे अनुकूल हो, और फिर उसमें महारत हासिल करना सीखता है। कुछ लोगों को बाजार की चाल पर नजर रखना पसंद है, तो कुछ बाजार के शोर को छानना या वोलैटिलिटी मापना पसंद करते हैं।

लेकिन सबसे अच्छे टेक्निकल इंडिकेटर कौन से हैं? सच कहें तो हर ट्रेडर आपको अलग जवाब देगा। एक एनालिस्ट किसी इंडिकेटर की कसम खाएगा, तो दूसरा उसे पूरी तरह खारिज कर देगा। फिर भी कुछ इंडिकेटर बेहद लोकप्रिय हैं: RSI, MA, MACD, StochRSI और BB।

जानना चाहते हैं कि ये क्या हैं और इनका इस्तेमाल कैसे होता है? आगे पढ़ते रहिए।

परिचय

ट्रेडर एसेट की कीमतों में होने वाले बदलावों के बारे में ज्यादा जानकारी पाने के लिए टेक्निकल इंडिकेटर का इस्तेमाल करते हैं। ये इंडिकेटर मौजूदा बाजार के माहौल में पैटर्न और खरीद-बिक्री के संकेत आसानी से पकड़ लेते हैं। इंडिकेटर कई तरह के होते हैं और इनका इस्तेमाल डे ट्रेडर, स्विंग ट्रेडर और कभी-कभी लंबी अवधि के निवेशक भी खूब करते हैं। कुछ पेशेवर एनालिस्ट और अनुभवी ट्रेडर तो अपने खुद के इंडिकेटर तक बना लेते हैं। इस लेख में हम टेक्निकल एनालिसिस के कुछ सबसे लोकप्रिय इंडिकेटर का संक्षिप्त परिचय दे रहे हैं, जो किसी भी ट्रेडर की मार्केट एनालिसिस टूलकिट में शामिल हो सकते हैं।

1. रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI)

RSI एक मोमेंटम इंडिकेटर है, जो हाल के प्राइस बदलावों की तीव्रता मापकर बताता है कि कोई एसेट ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड (डिफ़ॉल्ट सेटिंग पिछली 14 अवधियों की होती है, यानी 14 दिन, 14 घंटे वगैरह)। यह 0 से 100 के बीच मान वाले ऑसिलेटर के रूप में दिखाई देता है।

चूंकि RSI एक मोमेंटम इंडिकेटर है, यह कीमत बदलने की रफ्तार (मोमेंटम) दिखाता है। इसका मतलब है कि अगर कीमत चढ़ते समय मोमेंटम भी बढ़ रहा है, तो अपट्रेंड मजबूत है और ज्यादा से ज्यादा खरीदार बाजार में आ रहे हैं। इसके उलट, कीमत चढ़ते समय मोमेंटम का कमजोर पड़ना यह संकेत दे सकता है कि विक्रेता जल्द ही बाजार पर हावी होने वाले हैं।

RSI की पारंपरिक व्याख्या यह है कि 70 से ऊपर एसेट ओवरबॉट है और 30 से नीचे ओवरसोल्ड। इसलिए चरम मान आने वाले ट्रेंड रिवर्सल या गिरावट का इशारा कर सकते हैं। हालांकि इन्हें सीधे खरीद-बिक्री के संकेत की तरह नहीं लेना चाहिए। टेक्निकल एनालिसिस (TA) के कई दूसरे तरीकों की तरह RSI भी गलत या भ्रामक संकेत दे सकता है, इसलिए किसी ट्रेड में उतरने से पहले दूसरे पहलुओं पर भी गौर करना हमेशा फायदेमंद रहता है।

2. मूविंग एवरेज (MA)

मूविंग एवरेज बाजार के शोर को छानकर और ट्रेंड की दिशा को उभारकर प्राइस मूवमेंट को सहज बनाते हैं। चूंकि ये पिछले प्राइस डेटा पर आधारित होते हैं, इसलिए यह एक लैगिंग (पीछे चलने वाला) इंडिकेटर है।

सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले दो मूविंग एवरेज हैं: सिंपल मूविंग एवरेज (SMA या MA) और एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA)। SMA किसी तय अवधि के प्राइस डेटा का औसत निकालकर बनता है। मसलन, 10-दिन का SMA पिछले 10 दिनों की औसत कीमत से निकलता है। वहीं EMA सबसे ताजा प्राइस डेटा को ज्यादा वजन देता है, जिससे यह हाल के प्राइस बदलावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।

जैसा कि पहले बताया, मूविंग एवरेज एक लैगिंग इंडिकेटर है: अवधि जितनी लंबी होगी, देरी उतनी ही ज्यादा होगी। इसीलिए 200-दिन का SMA हाल के प्राइस बदलावों पर 50-दिन के SMA की तुलना में धीमी प्रतिक्रिया देता है।

ट्रेडर अक्सर मौजूदा मार्केट ट्रेंड को परखने के लिए कीमत की तुलना खास मूविंग एवरेज से करते हैं। मसलन, अगर कीमत लंबे समय तक 200-दिन के SMA से ऊपर बनी रहती है, तो कई ट्रेडर मानते हैं कि एसेट बुल मार्केट में है।

मूविंग एवरेज को खरीद या बिक्री के संकेत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मसलन, अगर 100-दिन का SMA 200-दिन के SMA के नीचे चला जाए, तो इसे बिक्री का संकेत माना जा सकता है। लेकिन इस क्रॉसओवर का मतलब क्या है? यही कि पिछले 100 दिनों की औसत कीमत अब पिछले 200 दिनों की औसत से कम है। बेचने के पीछे सोच यह है कि छोटी अवधि की प्राइस चाल अब अपट्रेंड के साथ नहीं चल रही, इसलिए ट्रेंड पलट सकता है।

3. मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD)

MACD दो मूविंग एवरेज के आपसी रिश्ते के जरिए किसी एसेट का मोमेंटम बताता है। यह दो लाइनों से बनता है: MACD लाइन और सिग्नल लाइन। MACD लाइन 12-अवधि के EMA में से 26-अवधि का EMA घटाकर निकाली जाती है, जबकि सिग्नल लाइन MACD लाइन का 9-अवधि का EMA होती है। कई चार्टिंग टूल्स में एक हिस्टोग्राम भी होता है, जो MACD लाइन और सिग्नल लाइन के बीच की दूरी दिखाता है।

MACD और प्राइस मूवमेंट के बीच डाइवर्जेंस देखकर ट्रेडर मौजूदा ट्रेंड की ताकत समझ सकते हैं। मसलन, अगर कीमत चढ़ रही है और MACD गिर रहा है, तो बाजार पलट सकता है। इस स्थिति में MACD हमें क्या बताता है? यही कि कीमत कमजोर पड़ते मोमेंटम के बीच चढ़ रही है, इसलिए गिरावट या रिवर्सल की संभावना ज्यादा है।

ट्रेडर इस इंडिकेटर का इस्तेमाल MACD लाइन और उसकी सिग्नल लाइन के क्रॉसओवर पकड़ने के लिए भी कर सकते हैं। मसलन, अगर MACD लाइन सिग्नल लाइन को ऊपर की ओर काटती है, तो यह खरीद का संकेत हो सकता है। इसके उलट, अगर MACD लाइन सिग्नल लाइन को नीचे की ओर काटती है, तो यह बिक्री का संकेत हो सकता है।

मोमेंटम मापने के लिए MACD को अक्सर RSI के साथ इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दोनों अलग-अलग पहलुओं पर आधारित हैं। साथ मिलकर ये बाजार की ज्यादा संपूर्ण टेक्निकल तस्वीर पेश करते हैं।

4. स्टोकास्टिक RSI (StochRSI)

स्टोकास्टिक RSI एक मोमेंटम ऑसिलेटर है, जिसका इस्तेमाल यह जानने के लिए होता है कि कोई एसेट ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड। नाम से ही जाहिर है कि यह RSI से बना है, क्योंकि यह प्राइस डेटा के बजाय RSI के मानों से निकाला जाता है। इसे स्टोकास्टिक ऑसिलेटर के फॉर्मूले को सामान्य RSI मानों पर लागू करके बनाया जाता है। StochRSI के सामान्य मान 0 से 1 (या 0 से 100) के बीच रहते हैं।

अपनी ज्यादा रफ्तार और संवेदनशीलता की वजह से StochRSI ऐसे कई संकेत दे सकता है जिनकी व्याख्या मुश्किल होती है। आमतौर पर यह तब सबसे उपयोगी होता है जब यह अपने पैमाने के ऊपरी या निचले सिरे के करीब होता है।

0.8 से ऊपर के StochRSI मान आमतौर पर ओवरबॉट माने जाते हैं, जबकि 0.2 से नीचे के मान ओवरसोल्ड माने जा सकते हैं। 0 का मतलब है कि RSI मापी गई अवधि (डिफ़ॉल्ट रूप से आमतौर पर 14) में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। 1 का मतलब है कि RSI मापी गई अवधि में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

RSI की ही तरह, StochRSI का ओवरबॉट या ओवरसोल्ड होना यह नहीं बताता कि कीमत जरूर पलटेगी। StochRSI के मामले में यह बस इतना दिखाता है कि RSI का मान (जिससे StochRSI निकलता है) हाल की रीडिंग के चरम के करीब है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि StochRSI, RSI से ज्यादा संवेदनशील है और इसलिए ज्यादा गलत या भ्रामक संकेत देने की प्रवृत्ति रखता है।

5. बोलिंगर बैंड्स (BB)

बोलिंगर बैंड्स बाजार की वोलैटिलिटी के साथ-साथ ओवरबॉट और ओवरसोल्ड स्थितियों को मापते हैं। ये तीन लाइनों से बनते हैं: SMA (मिडल बैंड) और ऊपरी व निचले बैंड। सेटिंग्स अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर ऊपरी और निचले बैंड मिडल बैंड से दो स्टैंडर्ड डेविएशन की दूरी पर होते हैं। वोलैटिलिटी बढ़ने-घटने के साथ बैंड के बीच की दूरी भी चौड़ी या संकरी होती जाती है।

आम तौर पर, कीमत ऊपरी बैंड के जितना करीब होगी, चार्ट पर एसेट ओवरबॉट स्थिति के उतना करीब होगा। इसके उलट, कीमत निचले बैंड के जितना करीब होगी, वह ओवरसोल्ड स्थिति के उतना करीब होगी। कीमत ज्यादातर बैंड के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभार यह उनके ऊपर या नीचे निकल जाती है। यह घटना अपने आप में कोई ट्रेडिंग सिग्नल नहीं है, लेकिन यह बाजार की चरम स्थितियों का संकेत दे सकती है।

BB का एक और अहम कॉन्सेप्ट है स्क्वीज़ (squeeze): कम वोलैटिलिटी का ऐसा दौर जिसमें सारे बैंड बेहद करीब आ जाते हैं। इसे भविष्य में संभावित वोलैटिलिटी के संकेत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह, ऊंची वोलैटिलिटी के दौर के बाद शांत दौर भी आ सकते हैं।

अंतिम विचार

इंडिकेटर भले ही डेटा दिखाते हों, यह याद रखना जरूरी है कि उस डेटा की व्याख्या बेहद व्यक्तिपरक होती है। इसलिए एक कदम पीछे हटकर यह सोचना हमेशा फायदेमंद रहता है कि कहीं निजी पूर्वाग्रह आपके फैसलों को प्रभावित तो नहीं कर रहे। जो चीज एक ट्रेडर के लिए साफ खरीद का संकेत है, वही दूसरे के लिए बिक्री का संकेत हो सकती है।

बाजार विश्लेषण के ज्यादातर तरीकों की तरह इंडिकेटर भी तब सबसे अच्छा काम करते हैं, जब उन्हें एक-दूसरे के साथ या फंडामेंटल एनालिसिस (FA) जैसे दूसरे तरीकों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए।

और टेक्निकल एनालिसिस (TA) सीखने का सबसे अच्छा तरीका है खूब अभ्यास करना।