फंडामेंटल एनालिसिस क्या है?

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फंडामेंटल एनालिसिस विश्लेषण का वह तरीका है जिसमें किसी फाइनेंशियल एसेट की कीमत को प्रभावित कर सकने वाले सभी मैक्रो और माइक्रो कारकों को ध्यान में रखकर उसकी वैल्यू आंकी जाती है। इसमें उन बातों को देखा जाता है जो पूरी तस्वीर बनाती हैं — किसी क्रिप्टोकरेंसी की मौजूदा स्थिति, क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स में हो रहे बदलाव, देश या दुनिया की आर्थिक हालत, और महंगाई या ब्याज दरों की नीतियां। मकसद यह होता है कि एसेट आगे किस दिशा में जाएगा इसका अंदाज़ा लगाया जाए और उसी के हिसाब से निवेश किया जाए।

फंडामेंटल एनालिसिस आमतौर पर वे निवेशक इस्तेमाल करते हैं जिनका नज़रिया मीडियम या लॉन्ग टर्म का होता है। यह किसी क्रिप्टो एसेट की असली कीमत तय करने पर टिका है। इसी असली कीमत को "इंट्रिंसिक वैल्यू" भी कहा जाता है।

असली कीमत निकालने के कुछ क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव तरीके होते हैं। किसी क्रिप्टो एसेट का विश्लेषण करने के लिए उसके बारे में तथ्यात्मक जानकारी जुटानी ज़रूरी है। पूरी तस्वीर देखना फंडामेंटल एनालिसिस में काम आता है, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी में पल भर की गिरावट या तेज़ी इस विश्लेषण के लिए पर्याप्त डेटा नहीं मानी जाती।

फंडामेंटल एनालिसिस के तरीके कौन-से हैं?

कुछ बुनियादी तरीके हैं — अर्निंग पर शेयर, प्राइस टू अर्निंग रेशियो, और नेटवर्क वैल्यू टू ट्रेडिंग वॉल्यूम रेशियो। अर्निंग पर शेयर किसी कंपनी के मुनाफे को कुल जारी शेयरों की संख्या से भाग देकर निकाला जाता है। ऊंचे अर्निंग पर शेयर वाली कंपनी फंडामेंटल एनालिसिस करने वाले निवेशकों के लिए निवेश का अच्छा मौका मानी जा सकती है। प्राइस टू अर्निंग रेशियो शेयर की कीमत को अर्निंग पर शेयर से भाग देकर निकाला जाता है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी अपनी असल वैल्यू से महंगी है या सस्ती।

क्रिप्टोकरेंसी में इस्तेमाल होने वाला एक फंडामेंटल तरीका नेटवर्क वैल्यू टू ट्रांजैक्शन वॉल्यूम है। यह किसी क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट कैप को उसके रोज़ाना ट्रेडिंग वॉल्यूम से भाग देकर निकाला जाता है। इसे क्रिप्टो एसेट की इंट्रिंसिक वैल्यू दिखाने वाले पैमानों में से एक माना जाता है।

फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस में क्या फर्क है?

फंडामेंटल एनालिसिस में मैक्रो चीज़ें देखी जाती हैं — देश और दुनिया के वित्तीय हालात, राजनीतिक कारक, और संबंधित क्रिप्टोकरेंसी के प्रोजेक्ट में हो रही प्रगति। टेक्निकल एनालिसिस में किसी क्रिप्टोकरेंसी या दूसरे फाइनेंशियल एसेट के चार्ट पर प्राइस मूवमेंट और वॉल्यूम में बदलाव जैसे आंकड़ों पर आधारित इंडिकेटर काम आते हैं। पुराने डेटा के आधार पर चार्ट की आगे की चाल का अनुमान लगाया जाता है।

एक और बड़ा फर्क यह है कि फंडामेंटल एनालिसिस उन निवेशकों के काम आता है जो मीडियम और लॉन्ग टर्म के फैसले लेना चाहते हैं, जबकि टेक्निकल एनालिसिस उन ट्रेडर्स का औज़ार है जिनका मकसद कम अवधि के फैसले लेना होता है।

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