डे ट्रेडिंग टिप्स और एडवांस तकनीकें

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मुनाफ़ा और बढ़ाने के लिए कई डे ट्रेडिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पहली है स्कैल्पिंग — ट्रेडिंग की ऐसी शैली जिसमें ट्रेडर बाज़ार की छोटी-छोटी कीमत चालों का फ़ायदा उठाता है और पोज़िशन को थोड़े समय में ही खरीदकर बेच देता है। "मुनाफ़े को चलने दो" वाली सोच के उलट, स्कैल्पर आमतौर पर ट्रेडिंग के दिन में कई पोज़िशन खोलता और बंद करता है।

स्कैल्पिंग को डे ट्रेडिंग की सबसे अच्छी रणनीतियों में गिना जाता है, क्योंकि सफल स्कैल्परों के जीतने वाले ट्रेडों का अनुपात हारने वाले ट्रेडों से ज़्यादा होता है, और उनका मुनाफ़ा उनके नुकसान के लगभग बराबर या उससे थोड़ा ज़्यादा रहता है। जल्दी मुनाफ़ा कमाने की यह क्षमता ट्रेडर का आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।

हालाँकि स्कैल्पिंग की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें ट्रेडर के पास एक पक्की एग्ज़िट रणनीति होनी चाहिए, क्योंकि एक बड़ा नुकसान दिनभर के कई छोटे-छोटे मुनाफ़ों को मिटा सकता है। साथ ही, पूरे दिन स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है। सफल स्कैल्पिंग के लिए सही टूल्स — जैसे लाइव प्राइस फ़ीड और बाज़ार तक सीधी पहुँच देने वाला ब्रोकर — होना भी ज़रूरी है।

हेजिंग

एक और बेहतरीन ट्रेडिंग तकनीक है हेजिंग। हेजिंग असल में ऐसा निवेश है जो कीमत के प्रतिकूल बदलाव की स्थिति में जोखिम कम करने के लिए किया जाता है। असल ज़िंदगी का उदाहरण: अगर आप बाढ़-प्रभावित इलाक़े में रहते हैं, तो अपने घर का बीमा करवाना। आप बाढ़ को रोक नहीं सकते, लेकिन बाढ़ आने पर नुकसान ज़रूर घटा सकते हैं।

डे ट्रेडिंग की हेजिंग रणनीतियाँ

हेजिंग करने वाले ज़्यादातर निवेशक ऐसे वित्तीय अनुबंधों का इस्तेमाल करते हैं जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति, जैसे शेयर, से तय होता है। इन्हें डेरिवेटिव कहा जाता है, और इनमें सबसे आम हैं ऑप्शंस। ऑप्शन आपको एक तय अवधि के लिए, बताए गए दाम पर शेयर खरीदने या बेचने का अधिकार देता है।

जोखिम प्रबंधन के नज़रिए से: अगर आप कोई शेयर यह सोचकर खरीदते हैं कि उसका दाम बढ़ेगा, लेकिन दाम आपकी उम्मीद के उलट जाने पर सुरक्षा चाहते हैं, तो पुट ऑप्शन एक हेज का काम करता है। थोड़े से प्रीमियम पर आप शेयर को तय दाम पर बेचने का अधिकार खरीद लेते हैं। दाम गिरने पर आप अपना पुट इस्तेमाल करते हैं और कमीशन छोड़कर अपनी शुरुआती पूँजी वापस पा लेते हैं।

एक और हेजिंग रणनीति है विविधीकरण (डायवर्सिफ़िकेशन): इसमें आप सब कुछ नहीं गँवाते, क्योंकि अलग-अलग एसेट क्लास एक साथ नहीं चढ़ते-गिरते। जैसे कोई निवेशक शेयरों के जोखिम की भरपाई के लिए बॉन्ड रखता है — शेयरों की कीमत गिरने पर बॉन्ड की कीमत बढ़ जाती है। यह बात उच्च-गुणवत्ता वाले कॉरपोरेट बॉन्ड या अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड पर लागू होती है; जबकि जंक बॉन्ड शेयरों की तरह ही गिरते हैं, क्योंकि दोनों जोखिम भरे निवेश हैं।

एल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग की बुनियादी बातें: अवधारणाएँ और उदाहरण

एल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग एक और एडवांस ट्रेडिंग तरीका है। इसे ब्लैक बॉक्स ट्रेडिंग भी कहा जाता है, और यह गणितीय समीकरणों की एक श्रृंखला (एक एल्गोरिथ्म) का इस्तेमाल करके इतनी तेज़ी से ट्रेड करता है, जितनी किसी आम इंसान के बस की बात नहीं।

एल्गोरिथ्मिक फ़ॉर्मूला मात्रा, कीमत और समय पर आधारित होता है। यह ट्रेडिंग सिस्टम ज़्यादा सटीक ट्रेड और ज़्यादा मुनाफ़ा देता है, क्योंकि यह इंसानी ट्रेडिंग में होने वाली भावनात्मक गलतियों को खत्म कर देता है।

एल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग व्यवहार में

मान लीजिए आप ये सीधे-सादे नियम अपनाते हैं:

  • जब 50-दिनों का मूविंग एवरेज 200-दिनों के मूविंग एवरेज को ऊपर की ओर काटे, तो इंस्ट्रूमेंट के 100 शेयर खरीदो।

  • जब 50-दिनों का मूविंग एवरेज 200-दिनों के मूविंग एवरेज को नीचे की ओर काटे, तो इंस्ट्रूमेंट के 100 शेयर बेच दो।

निर्देशों का यह सेट काफ़ी सरल है: एल्गोरिथ्म मूविंग एवरेज और बाज़ार की कीमतों पर अपने आप नज़र रखता है और तय की गई बाज़ार शर्तें पूरी होते ही ऑर्डर लगा देता है। यह ट्रेडिंग के मौक़े को सही पहचानकर सब कुछ पूरी तरह अपने आप करता है।

एल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग के फ़ायदे

एल्गोरिथ्मिक ट्रेडिंग के फ़ायदे ये हैं:

  • ऑर्डर अपने आप लगते हैं, इसलिए ट्रेड सबसे अच्छे संभव दाम पर पूरे होते हैं।

  • लेनदेन की लागत घटती है और मैनुअल गलतियों का जोखिम कम होता है।

  • एक साथ कई बाज़ार स्थितियों पर नज़र रखी जा सकती है।

  • एल्गो-ट्रेडिंग को ऐतिहासिक डेटा पर परखकर देखा जा सकता है कि कोई रणनीति समय के साथ कैसा प्रदर्शन करती है।

  • मनोवैज्ञानिक-भावनात्मक कारणों से होने वाली इंसानी गलतियों की आशंका घटती है।

अनुभवी ट्रेडर बनने के लिए सिर्फ़ गंभीर अभ्यास और धैर्य ही नहीं, बल्कि सही ट्रेडिंग पद्धति भी चाहिए। सही तरीके से अपनाई जाएँ, तो ये एडवांस डे ट्रेडिंग तकनीकें ट्रेडरों को बड़ी बढ़त देती हैं और उसी अनुपात में मुनाफ़ा भी बढ़ाती हैं।