क्रिप्टो में मार्केट मैनिपुलेशन क्या है?

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ज़रूरी बातें

  • मार्केट मैनिपुलेशन का मतलब है किसी एसेट की कीमत या बाज़ार के व्यवहार को बनावटी तरीके से प्रभावित करने की कोशिश।
  • क्रिप्टो एक्सचेंज अब मैनिपुलेटर्स को लेकर पहले से ज़्यादा सतर्क हैं, फिर भी आम पैटर्न पहचानना ज़रूरी है ताकि आप गलत नीयत वाले लोगों को खुद भाँप सकें।
  • मैनिपुलेशन का पीछा करना एक धोखे भरा पकड़म-पकड़ाई का खेल है। आपकी क्रिप्टो होल्डिंग्स सुरक्षित रहें, इसके लिए हमने सबसे आम मैनिपुलेशन रणनीतियाँ और उनसे बचने के तरीके यहाँ रखे हैं।

इस लेख में आप क्रिप्टो मार्केट मैनिपुलेशन की बुनियादी बातें सीखेंगे और यह भी कि सबसे आम मैनिपुलेशन रणनीतियों से कैसे निपटें।

मार्केट मैनिपुलेशन यानी किसी एसेट की कीमत या बाज़ार के व्यवहार को बनावटी तरीके से प्रभावित करने की कोशिश। आमतौर पर इसके पीछे कोई ग्रुप या कोई एक व्यक्ति होता है, जो बाज़ार में एक भ्रम खड़ा करके मुनाफ़ा कमाना चाहता है। जैसे "पंप एंड डंप" में कोई सस्ते एसेट की कीमत झूठी खबरों के दम पर चढ़ा देता है और फिर बेचकर मुनाफ़ा निकाल लेता है। यह उदाहरण शायद आपको फ़िल्म The Wolf of Wall Street से याद हो — कुख्यात शेयर बाज़ार मैनिपुलेटर जॉर्डन बेलफ़र्ट की सच्ची कहानी।

2018 में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने यह पता लगाने के लिए जाँच शुरू की थी कि बिटकॉइन नेटवर्क पर धोखाधड़ी वाली कीमत हेराफेरी हो रही है या नहीं। क्रिप्टो बाज़ार अभी नया है और बढ़ रहा है, यानी गलत इरादे वाले लोग नियमन की कमी का फ़ायदा उठाने के रास्ते तलाशते रहेंगे। मैनिपुलेशन से बाज़ार को कोई फ़ायदा नहीं होता और इसमें शामिल लोगों को फ़ायदे से कहीं ज़्यादा नुकसान पहुँचता है। कई मामलों में यह गैरकानूनी है, फिर भी नियामकों और अधिकारियों के लिए इसे पकड़ पाना हमेशा आसान नहीं होता। इस लेख में आप क्रिप्टो मार्केट मैनिपुलेशन की बुनियादी बातें सीखेंगे और यह भी कि सबसे आम मैनिपुलेशन रणनीतियों से कैसे निपटें।

मार्केट मैनिपुलेशन और करेंसी मैनिपुलेशन: फ़र्क क्या है?

क्रिप्टो मार्केट मैनिपुलेशन को करेंसी मैनिपुलेशन के साथ नहीं मिलाना चाहिए। मुद्रा में हेरफेर सिर्फ़ सरकारें और केंद्रीय बैंक जैसे प्राधिकरण ही कर सकते हैं। करेंसी मैनिपुलेशन पूरी तरह कानूनी है, हालाँकि दूसरे देश इस पर आपत्ति जता सकते हैं। मिसाल के तौर पर, कोई सरकार अपनी मुद्रा का मूल्य किसी दूसरी मुद्रा के मुकाबले घटाकर खुद को ज़्यादा प्रतिस्पर्धी दिखाना चाह सकती है। इसे आम भाषा में "अवमूल्यन" कहा जाता है।

मार्केट मैनिपुलेशन की चार आम रणनीतियाँ

1. पंप एंड डंप

क्रिप्टो बाज़ार का सबसे आम खलनायक है पंप एंड डंप, जिसमें लोगों का एक समूह मिलकर किसी कॉइन की कीमत बनावटी तरीके से चढ़ाता है। निशाने पर आमतौर पर कम मार्केट कैप वाले वे कॉइन होते हैं जो गिने-चुने एक्सचेंजों पर ही मिलते हैं। समूह के सदस्य कॉइन पहले ही खरीद लेते हैं और जैसे ही निवेशकों और यूज़र्स में खरीदने की पर्याप्त दिलचस्पी दिखती है, वे बेच देते हैं। पिछले कुछ सालों में Reddit, Telegram और Discord जैसे सोशल मीडिया समुदायों ने पंप एंड डंप को और आसान बना दिया है। Moon Pumps जैसे नाम शायद आपको याद हों। ऐसे मामलों में आमतौर पर आयोजक कमाते हैं और बाकी भागीदार नुकसान उठाते हैं।

2. व्हेल वॉल का झाँसा

स्पूफ़िंग का यह तरीका बिटकॉइन के शुरुआती दिनों में खूब चलता था और कम नियमन वाले एक्सचेंजों पर आज भी दिखता है। इसमें कोई व्हेल ऑर्डर बुक में बहुत बड़े ऑर्डर लगाकर नकली खरीद और बिक्री की दीवारें खड़ी कर देती है। मान लीजिए व्हेल बाज़ार में नकारात्मक माहौल बनाकर किसी कॉइन की कीमत गिराना चाहती है — तो वह बड़े सेल ऑर्डर लगाना शुरू करती है ताकि निवेशक घबराकर बेचने लगें। जैसे ही बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू होती है, व्हेल अपने सेल ऑर्डर रद्द कर देती है और नीचे के भाव पर खरीदना शुरू कर देती है।

3. नकली सौदों से वॉल्यूम बढ़ाना

वॉल्यूम बढ़ाने वाला फ़र्ज़ीवाड़ा व्हेल वॉल के झाँसे जैसा ही है — दोनों बाज़ार में भ्रामक जानकारी भरते हैं। इस रणनीति में कोई व्यक्ति या समूह एक ही क्रिप्टोकरेंसी को तेज़ी से बार-बार खरीदता और बेचता है, जिससे वॉल्यूम बनावटी तरीके से फूल जाता है। एसेट में बढ़ी हुई यह हलचल निवेशकों और यूज़र्स का ध्यान खींचती है और कीमत को और बिगाड़ देती है। छोटे, बिना नियमन वाले एक्सचेंज अक्सर ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने, ज़्यादा कमीशन कमाने और ज़्यादा यूज़र जुटाने के लिए ऐसे नकली सौदों का सहारा लेते हैं।

4. स्टॉप हंटिंग

स्टॉप हंटिंग में व्हेल किसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत को ठीक उस स्तर तक खींच लाती है जहाँ बाज़ार के लोगों ने अपने स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगाए होते हैं। ज़्यादातर लोग अपने स्टॉप एक जैसे तकनीकी स्तरों पर ही रखते हैं। व्हेल कई सेल ऑर्डर लगाकर कीमत गिराती है और स्टॉप ट्रिगर करा देती है — इससे ज़बरदस्त वोलैटिलिटी बनती है और उसे एसेट सस्ते में खरीदने का मौका मिल जाता है।

मार्केट मैनिपुलेशन का क्रिप्टो बाज़ार पर क्या असर पड़ता है?

मैनिपुलेशन क्रिप्टो बाज़ार की वोलैटिलिटी बढ़ाता है और नए निवेशकों को यह बाज़ार अराजक और असुरक्षित लगने लगता है। जब तक क्रिप्टो मार्केट मैनिपुलेशन के इर्द-गिर्द ग्रे एरिया बने रहेंगे, नियामक और सरकारें इस नए उद्योग की पड़ताल करती रहेंगी। कम वॉल्यूम वाले कॉइनों में हेरफेर आसान है, और बड़ी तेज़ी के बाद तीखी गिरावट भी आम बात है — खासकर अपेक्षाकृत छोटे क्रिप्टो एक्सचेंजों पर। कभी-कभी तो व्हेल को कुछ खरीदने या बेचने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती। बस एक रहस्यमय ट्वीट किसी एसेट को आसमान पर पहुँचा सकता है या, इससे भी बुरा, नीचे तल पर पटक सकता है। अगर आप अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स को मैनिपुलेशन से बचाना चाहते हैं, तो आगे पढ़िए और कुछ रणनीतियाँ अपने तरकश में जोड़ लीजिए।

मार्केट मैनिपुलेशन से कैसे निपटें?

मार्केट मैनिपुलेशन का पीछा करना एक पेचीदा लुका-छिपी का खेल है। किसी भी एसेट में पैसा लगाने से पहले अपनी खुद की रिसर्च और जाँच-पड़ताल करना कभी न भूलें। अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स को मैनिपुलेशन से बचाने के लिए हमने ये अहम रणनीतियाँ चुनी हैं।

1. कई स्रोतों से पुष्टि करें।

किसी एसेट की चाल जाँचने के लिए सिर्फ़ एक ही स्रोत, जैसे ऑर्डर बुक, पर भरोसा न करें। CoinGecko और CoinMarketCap जैसे अलग-अलग स्रोतों से उसके आँकड़े मिलाकर देखें।

2. पुराने प्राइस ट्रेंड पर ध्यान दें।

व्हेल समय-समय पर अलग-अलग एक्सचेंजों पर नकली सौदे करके वॉल्यूम बढ़ाती हैं — जैसे किसी लोकप्रिय एक्सचेंज पर बड़ा ऑर्डर और छोटे एक्सचेंज पर उसका उल्टा। हाल की हलचल के बजाय पुराने प्राइस ट्रेंड के आधार पर फ़ैसले लेकर आप इस चाल से बच सकते हैं।

3. अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखें।

आप कितना जोखिम उठाना चाहते हैं, उसी हिसाब से आपके क्रिप्टो पोर्टफोलियो में एसेट्स की सेहतमंद विविधता होनी चाहिए। यानी सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें। अगर पोर्टफोलियो पर्याप्त रूप से बँटा हुआ है, तो मार्केट मैनिपुलेशन आपकी होल्डिंग्स के छोटे-से हिस्से को ही छू पाएगा।

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