सेल्फिश माइनिंग क्या है?

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माइनिंग को सबसे सरल शब्दों में समझें तो यह वह व्यवस्था है जिसमें ब्लॉकचेन पर नए ब्लॉक जोड़ने के बदले माइनर को क्रिप्टोकरेंसी इनाम के रूप में मिलती है। सेल्फिश माइनिंग इसके उलट एक नुक़सानदेह रणनीति है, जिसे कुछ माइनर अपना मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए अपनाते हैं। सेल्फिश माइनर ब्लॉकचेन में जोड़े गए अपने ब्लॉक छिपा लेते हैं और फ़ोर्क बनाकर इस गुप्त शाखा को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

यानी सेल्फिश माइनिंग वह रणनीति है जिसमें माइनर ब्लॉकचेन में अपने योगदान वाले ब्लॉक छिपाकर कमाई करना चाहते हैं। ऐसा करने वालों को सेल्फिश माइनर कहा जाता है। उनका मक़सद ईमानदार माइनरों को ग़लत ब्लॉकचेन पर काम करने के लिए मजबूर करके ख़ुद ज़्यादा बिटकॉइन कमाना होता है।

सेल्फिश माइनिंग कैसे होती है?

सेल्फिश माइनर ब्लॉकचेन में जोड़े गए ब्लॉक तुरंत प्रकाशित नहीं करते, बल्कि अपने पास रोक लेते हैं। नतीजा यह होता है कि ब्लॉकचेन दो हिस्सों में बँट जाती है। यह बँटवारा बाक़ी माइनरों को भ्रमित कर सकता है और वे ग़लत ब्लॉकचेन पर माइनिंग करने लगते हैं। ग़लत चेन पर काम करने वाले माइनर अपनी ऊर्जा और संसाधन बर्बाद कर रहे होते हैं।

यहीं सेल्फिश माइनरों को अनुचित फ़ायदा मिलता है, क्योंकि ईमानदार माइनर नक़ली चेन पर मेहनत कर रहे होते हैं। छिपाई हुई ब्लॉकचेन के ज़रिए सेल्फिश माइनर दूसरों की मेहनत पर ज़्यादा बिटकॉइन कमाना चाहते हैं। साथ ही, सामान्य हालात की तुलना में माइनिंग में लगने वाली ऊर्जा लागत घट जाती है, इसलिए इस लिहाज़ से भी उन्हें मुनाफ़ा होता है।

क्या सेल्फिश माइनिंग बिटकॉइन के लिए समस्या है?

सेल्फिश माइनिंग के साथ माइनिंग के केंद्रीकरण का ख़तरा जुड़ा है, और माइनिंग का केंद्रीकरण बिटकॉइन के मूल दर्शन के बिल्कुल ख़िलाफ़ है। फिर भी यह कहना हक़ीक़त से दूर लगता है कि सेल्फिश माइनिंग बिटकॉइन के लिए ख़तरा बन जाएगी। इसके ख़िलाफ़ उपाय मौजूद हैं और इस विषय पर कई सिद्धांत भी सामने आए हैं।

2014 में ईथन हाइलमैन का प्रस्तावित Freshness Preferred इन्हीं उपायों में से एक है। Freshness Preferred एक बचाव तंत्र है जो सेल्फिश माइनरों को दंडित करता है: उनके बनाए छिपे ब्लॉक रोक दिए जाते हैं और माइनरों पर जुर्माना लगता है।

2018 में जेक गोबर ने एक और सिद्धांत रखा, जिसमें सामने आया कि सेल्फिश माइनिंग ईमानदार माइनिंग से ज़्यादा मुनाफ़े वाली नहीं है। गोबर के मुताबिक़, अगर सेल्फिश माइनिंग ज़्यादा फ़ायदेमंद होती तो हर कोई यही करता, और सबके ऐसा करने से मुनाफ़ा घट जाता, क्योंकि सेल्फिश माइनर समूहों के बीच होड़ शुरू हो जाती।