शुरुआती लोगों के लिए 10 डे ट्रेडिंग टिप्स

· 6 min read

किसी वित्तीय साधन को एक ही दिन में — या शायद दिन भर में कई बार — खरीदने और बेचने को डे ट्रेडिंग कहा जाता है। अगर सही तरीके से किया जाए, तो कीमतों के छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना एक मुनाफ़े वाला खेल हो सकता है। लेकिन नौसिखियों और उन सभी लोगों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है, जो एक सोची-समझी योजना पर नहीं चलते।

अगर आप रोज़ाना ट्रेडिंग से कमाई करना चाहते हैं, लेकिन अभी शुरुआत ही कर रहे हैं, तो हम आपको Hafizebot इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। Hafizebot हर क्रिप्टोकरेंसी के लिए 240 से ज़्यादा इंडिकेटर्स को स्कैन और एनालाइज़ करता है और रोज़ ट्रेड करता है।

नीचे हम शुरुआती लोगों के लिए 10 डे ट्रेडिंग तरीकों पर बात करेंगे। फिर बुनियादी चार्ट और पैटर्न, कब खरीदें-कब बेचें, और नुकसान कैसे सीमित करें — इन सब पर चर्चा करेंगे।

1. ज्ञान की ताक़त

डे ट्रेडर्स को डे ट्रेडिंग के तरीकों से परिचित होने के साथ-साथ शेयर बाज़ार की ताज़ा ख़बरों और शेयरों पर असर डालने वाली घटनाओं से भी अपडेट रहना पड़ता है। इनमें लीडिंग इंडिकेटर्स से जुड़ी घोषणाएँ, अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व की ब्याज दर योजनाएँ और दूसरी आर्थिक, व्यावसायिक व वित्तीय ख़बरें शामिल हो सकती हैं।

तो अपना होमवर्क कीजिए। जिन शेयरों में ट्रेड करना चाहते हैं, उनकी एक सूची बनाइए। चुनी हुई कंपनियों, उनके शेयरों और बाज़ारों की सामान्य चाल की जानकारी रखते रहिए। बिज़नेस की ख़बरें पढ़िए और भरोसेमंद न्यूज़ वेबसाइटों को बुकमार्क कर लीजिए।

2. पैसा अलग रखें

तय करें कि हर सौदे में आप कितनी पूँजी दाँव पर लगाने को तैयार हैं, और उस पर कायम रहें। कई कामयाब डे ट्रेडर हर ट्रेड में अपने खाते की रकम का 1% से 2% या उससे भी कम जोखिम में डालते हैं। अगर आपके पास 40,000 डॉलर का ट्रेडिंग खाता है और आप हर सौदे में अपनी पूँजी का 0.5% जोखिम में डालने को तैयार हैं, तो प्रति ट्रेड आपका अधिकतम नुकसान 200 डॉलर होगा (0.5% × 40,000 डॉलर)।

एक अतिरिक्त रकम अलग रख लें, जिससे आप ट्रेड कर सकें और जिसे खोने के लिए आप तैयार हों।

3. समय दें

डे ट्रेडिंग आपका समय और ध्यान दोनों माँगती है। सच कहें तो आपको अपने दिन का ज़्यादातर हिस्सा इसे देना होगा। अगर आपके पास समय कम है, तो इसके बारे में सोचिए भी मत।

डे ट्रेडिंग करने वाले को बाज़ारों पर नज़र रखनी होती है और उन मौकों की तलाश में रहना होता है, जो ट्रेडिंग के घंटों में कभी भी सामने आ सकते हैं। मकसद है — तेज़ी से, लेकिन पूरी सजगता के साथ कदम उठाना।

4. छोटी शुरुआत करें

नए ट्रेडर के तौर पर एक बार में ज़्यादा से ज़्यादा एक या दो शेयरों पर ही ध्यान दें। कम शेयर होंगे तो उन पर नज़र रखना और मौके पहचानना आसान होगा। हाल के दिनों में फ्रैक्शनल शेयरों (शेयर के अंश) की ट्रेडिंग भी काफ़ी लोकप्रिय हो रही है। इससे आपको छोटी रकम निवेश करने का विकल्प मिल जाता है।

इसी वजह से कई ब्रोकर अब सिर्फ़ 25 डॉलर में शेयर का एक अंश खरीदने की सुविधा देते हैं — यानी अगर Amazon का शेयर इस समय 3,400 डॉलर पर चल रहा है, तो पूरे शेयर के 1% से भी कम में।

5. पेनी स्टॉक्स से बचें

आप यक़ीनन सस्ते सौदों और कम दामों की तलाश में होंगे, लेकिन पेनी स्टॉक्स से दूर रहें। इन शेयरों में अक्सर लिक्विडिटी नहीं होती, और इनके ज़रिए रातोंरात अमीर बनने की संभावना अक्सर बहुत कम होती है।

5 डॉलर प्रति शेयर से कम पर कारोबार करने वाले कई शेयर मुख्य स्टॉक एक्सचेंजों की सूची से हटा दिए जाते हैं और सिर्फ़ ओवर-द-काउंटर (OTC) ही ख़रीदे-बेचे जा सकते हैं। जब तक कोई वाक़ई अच्छा मौका न हो और आपने पूरा होमवर्क न कर लिया हो, इनसे दूर ही रहें।

6. ट्रेड का समय सोच-समझकर चुनें

ट्रेडर्स और निवेशकों के ढेरों ऑर्डर, जो सुबह बाज़ार खुलते ही एक्ज़िक्यूट होने लगते हैं, कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं। बाज़ार खुलते समय कोई अनुभवी खिलाड़ी शायद पैटर्न पहचानकर सही समय पर ऑर्डर लगाकर फायदा उठा ले। लेकिन नए लोगों के लिए बेहतर यही है कि वे कदम उठाने से पहले शुरुआती 15 से 20 मिनट बाज़ार को सिर्फ़ देखें।

दिन के बीच का समय आमतौर पर कम अस्थिर होता है। फिर जैसे-जैसे बाज़ार बंद होने का समय क़रीब आता है, हलचल दोबारा बढ़ने लगती है। भीड़भाड़ वाले इन घंटों में मौके तो मिलते हैं, लेकिन शुरुआत में नौसिखियों के लिए इनसे बचना ही सुरक्षित है।

7. नुकसान घटाने वाले लिमिट ऑर्डर

तय करें कि ट्रेड लगाने और पूरा करने के लिए आप कौन-से ऑर्डर इस्तेमाल करेंगे। लिमिट ऑर्डर या मार्केट ऑर्डर? मार्केट ऑर्डर उस समय की सबसे अच्छी उपलब्ध कीमत पर पूरा होता है, बिना किसी मूल्य गारंटी के। यह तब काम आता है, जब आपको किसी ख़ास कीमत पर सौदा होने की परवाह नहीं होती और आप बस बाज़ार में दाख़िल होना या उससे निकलना चाहते हैं।

लिमिट ऑर्डर में कीमत की गारंटी होती है, लेकिन एक्ज़िक्यूशन की नहीं। चूँकि आप ख़ुद तय करते हैं कि आपका ऑर्डर किस कीमत पर पूरा होना चाहिए, लिमिट ऑर्डर आपको ज़्यादा सटीकता और भरोसे के साथ ट्रेड करने में मदद करते हैं। बाज़ार के पलटने पर लिमिट ऑर्डर आपके नुकसान को कम कर सकते हैं। हाँ, अगर बाज़ार आपकी कीमत तक नहीं पहुँचा, तो आपका ऑर्डर पूरा नहीं होगा और आपकी पोज़ीशन बनी रहेगी।

8. नज़र सिर्फ़ मुनाफ़े पर रखें

मुनाफ़े में रहने के लिए ज़रूरी नहीं कि कोई रणनीति हर बार कामयाब हो। कामयाब ट्रेडर्स के भी शायद सिर्फ़ 50% से 60% ट्रेड ही मुनाफ़े में रहते हैं। फ़र्क़ यह है कि वे जीतने वाले सौदों से उतना कमा लेते हैं, जितना हारने वाले सौदों में नहीं गँवाते। यह पक्का करें कि हर ट्रेड का वित्तीय जोखिम आपके खाते के एक पहले से तय हिस्से तक सीमित हो, और एंट्री व एग्ज़िट की रणनीतियाँ साफ़-साफ़ तय हों।

9. शांत रहें

शेयर बाज़ार कभी-कभी आपको बेचैन कर सकता है। एक डे ट्रेडर के तौर पर आपको अपने लालच, उम्मीद और डर पर काबू रखना सीखना होगा। फ़ैसले तर्क के आधार पर होने चाहिए, भावनाओं के नहीं।

10. रणनीति पर डटे रहें

कामयाब ट्रेडर्स को तेज़ी से कदम उठाने पड़ते हैं, लेकिन तेज़ी से सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ती। क्यों? क्योंकि उनके पास अपने ट्रेडिंग प्लान पर टिके रहने का अनुशासन और पहले से तय ट्रेडिंग रणनीति होती है। मुनाफ़े के पीछे भागने के बजाय अपने नुस्खे पर मज़बूती से कायम रहना बेहद ज़रूरी है। भावनाओं को इतना हावी न होने दें कि वे आपकी रणनीति बदलवा दें। डे ट्रेडर का मूलमंत्र याद रखें: "अपने ट्रेड की योजना बनाओ, अपनी योजना पर ट्रेड करो।"

डे ट्रेडिंग को क्या मुश्किल बनाता है?

डे ट्रेडिंग के लिए काफ़ी अनुभव और जानकारी चाहिए, और कई चीज़ें इसे मुश्किल बना सकती हैं।

सबसे पहले यह समझ लें कि आपका मुक़ाबला पेशेवर ट्रेडर्स से है। इन लोगों के पास सबसे आधुनिक उपकरण और इंडस्ट्री के बेहतरीन संपर्क होते हैं। इसीलिए आख़िरकार जीतने की स्थिति में वही रहते हैं। भेड़चाल में शामिल होने का नतीजा आमतौर पर यही होता है कि उनकी कमाई और बढ़ जाती है।

फिर यह भी समझ लें कि आपकी कमाई चाहे जितनी छोटी हो, सरकार उसमें से अपना हिस्सा ज़रूर माँगेगी। याद रखें कि शॉर्ट-टर्म मुनाफ़े पर — यानी उन निवेशों पर, जिन्हें आप एक साल या उससे कम रखते हैं — आपको मार्जिनल दर से टैक्स देना होगा। राहत की बात यह है कि आपके नुकसान आपकी कमाई के बराबर समायोजित हो जाएँगे।

इसके अलावा, एक नौसिखिए डे ट्रेडर के तौर पर आप उन भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पूर्वाग्रहों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकते हैं, जो ट्रेडिंग पर असर डालते हैं — मसलन जब आपका अपना पैसा दाँव पर हो और किसी सौदे में नुकसान हो रहा हो। भरपूर अनुभव और संसाधनों वाले पेशेवर ट्रेडर आमतौर पर इन बाधाओं को पार कर लेते हैं।

क्या खरीदें और कब — यह तय करना

क्या खरीदें

डे ट्रेडर्स ख़ास एसेट्स (शेयर, करेंसी, फ़्यूचर्स और ऑप्शंस) की कीमतों में छोटे-छोटे बदलावों का फ़ायदा उठाकर मुनाफ़ा कमाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे अक्सर बड़ी पूँजी के साथ लीवरेज का इस्तेमाल करते हैं। कुछ भी — मसलन कोई शेयर — खरीदने से पहले एक आम डे ट्रेडर तीन बातों पर ग़ौर करता है:

लिक्विडिटी। लिक्विड सिक्योरिटी को आप जल्दी और बेहतर स्थिति में मुनाफ़े के साथ ख़रीद-बेच सकते हैं। लिक्विडिटी का फ़ायदा है कम स्लिपेज और सख़्त (टाइट) स्प्रेड — यानी शेयर के बिड और आस्क प्राइस के बीच, और सौदे की अपेक्षित व वास्तविक कीमत के बीच कम अंतर।

वोलैटिलिटी। यह दिन भर की कीमत की रेंज को मापती है — यही वह मैदान है, जिसमें डे ट्रेडर काम करते हैं। जितनी ज़्यादा वोलैटिलिटी, उतनी ही ज़्यादा फ़ायदे — या नुकसान — की गुंजाइश।

ट्रेडिंग वॉल्यूम। यह इस बात का पैमाना है कि किसी तय अवधि में कोई शेयर कितनी बार ख़रीदा-बेचा जाता है। आमतौर पर इसे औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम कहा जाता है। वॉल्यूम ज़्यादा होने का मतलब है कि उस शेयर में काफ़ी दिलचस्पी है। किसी शेयर के वॉल्यूम में अचानक उछाल अक्सर कीमत में आने वाली बड़ी हलचल का संकेत होता है — ऊपर की ओर या नीचे की ओर।

कब खरीदें

जिन शेयरों (या दूसरे एसेट्स) में आप ट्रेड करना चाहते हैं, उनसे अच्छी तरह परिचित होने के बाद आपको अपने ट्रेड के लिए एंट्री पॉइंट चुनने होंगे। इसके लिए आप इन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं:

रियल-टाइम न्यूज़ सेवाएँ: चूँकि ख़बरों में शेयरों की कीमतें हिलाने की ताक़त होती है, इसलिए ऐसी सेवाओं की सदस्यता लेना ज़रूरी है, जो बाज़ार को हिला सकने वाली ख़बर आते ही आपको सूचित कर दें।

इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क, जिन्हें ECN भी कहा जाता है, कंप्यूटर-आधारित प्लेटफ़ॉर्म हैं, जो अलग-अलग मार्केट पार्टिसिपेंट्स के सबसे अच्छे बिड और आस्क प्राइस दिखाते हैं और फिर ऑर्डरों का अपने आप मिलान कर उन्हें पूरा करते हैं। Level 2 नाम की सब्सक्रिप्शन सेवा नैस्डैक (Nasdaq) की ऑर्डर बुक तक सीधी पहुँच देती है। नैस्डैक की ऑर्डर बुक में नैस्डैक या OTC Bulletin Board पर सूचीबद्ध हर सिक्योरिटी के लिए मार्केट मेकर्स के प्राइस कोट्स मौजूद रहते हैं।

ये सब मिलकर आपको यह अंदाज़ा देते हैं कि रियल टाइम में ऑर्डर कैसे पूरे होते हैं।

इंट्राडे कैंडलस्टिक चार्ट: कैंडलस्टिक्स कीमत की चाल को सीधे-सीधे समझने का ज़रिया हैं। इन पर आगे और बात करेंगे।

वे सटीक शर्तें तय करें और लिख लें, जिनके पूरा होने पर ही आप पोज़ीशन लेंगे। मसलन, "तेज़ी में खरीदो" जैसी बात बहुत अस्पष्ट है। इसके बजाय कुछ ज़्यादा ठोस और परखने लायक़ आज़माएँ — जैसे, ट्रेडिंग के पहले दो घंटों में दो-मिनट के चार्ट पर जब कीमत ट्रायंगल पैटर्न की ऊपरी ट्रेंडलाइन को तोड़कर ऊपर निकले, तब खरीदना, बशर्ते ट्रायंगल से पहले अपट्रेंड रहा हो (ट्रायंगल बनने से पहले कम से कम एक हायर स्विंग हाई और हायर स्विंग लो)।

एंट्री के मापदंड तय हो जाने के बाद और चार्ट देखें और परखें कि आपकी शर्तें हर दिन बनती हैं या नहीं। मिसाल के तौर पर, देखें कि क्या कोई कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न इशारा कर रहा है कि कीमत आपकी उम्मीद की दिशा में जाएगी। अगर हाँ, तो हो सकता है आपको किसी रणनीति का शुरुआती सिरा मिल गया हो।