क्वांटिटेटिव ईज़िंग नाम की गैर-पारंपरिक मौद्रिक नीति में देशों के केंद्रीय बैंक अपने यहाँ की नॉमिनल मनी सप्लाई बढ़ा देते हैं। जितनी ज़्यादा करेंसी छपकर बाज़ार में आती है, महंगाई उतनी ही बढ़ती है और फिएट करेंसी की एक इकाई की कीमत उतनी ही घटती जाती है।
इसीलिए वैल्यू स्टोर करने वाले साधनों में जिन एसेट्स की कुल सप्लाई सीमित होती है, वे अपने बाज़ार में महंगाई पैदा ही नहीं होने देते।
बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड कहे जाने की एक वजह यह है कि दोनों ही संसाधन सीमित हैं। लेकिन सोना सीमित संसाधन होने के बावजूद हमें यह नहीं पता कि कुल सप्लाई का कितना प्रतिशत अब तक निकाला, प्रोसेस किया और बाज़ार में लाया जा चुका है, इसलिए बचे हुए भंडार के बारे में भी हमारे पास कोई साफ़ जानकारी नहीं है। दूसरी ओर बिटकॉइन के बारे में हम जानते हैं कि वह कब और कितना बनेगा और किस साल कुल कितने बिटकॉइन तक बनाए जा सकते हैं। कुल 2 करोड़ 10 लाख बिटकॉइन माइन किए जाएँगे और यह प्रक्रिया 2140 में पूरी होगी।
जेनेसिस ब्लॉक ब्लॉकचेन पर बना पहला ब्लॉक है और इसके साथ ब्लॉक रिवॉर्ड के रूप में 50 बिटकॉइन जनरेट हुए थे। बिटकॉइन ब्लॉक रिवॉर्ड उन नए बिटकॉइन को कहते हैं जो माइनर्स को नेटवर्क पर सफलतापूर्वक प्रोसेस किए गए हर ब्लॉक के बदले मिलते हैं। हर 10 मिनट में होने वाले नए बिटकॉइन उत्पादन का तय अंतराल पर आधा रह जाना ब्लॉक रिवॉर्ड हाल्विंग कहलाता है। यह हाल्विंग हर 210,000 ब्लॉक पर दोहराई जाती है और लगभग हर चार साल में होती है। शुरुआती ब्लॉक रिवॉर्ड 28 नवंबर 2012 को घटकर 25 BTC, 9 जुलाई 2016 को 12.5 BTC और 11 मई 2020 की हाल्विंग के साथ 6.25 BTC रह गया।
ब्लॉक रिवॉर्ड हाल्विंग को सातोशी नाकामोतो ने इसलिए डिज़ाइन किया था ताकि बनने वाले बिटकॉइन की मात्रा घटाकर महंगाई की भरपाई की जा सके। बिटकॉइन नेटवर्क के विकेंद्रीकृत ढाँचे की वजह से हाल्विंग किसी व्यक्ति या संस्था पर निर्भर हुए बिना, बिना किसी बातचीत, किसी देश की सरकार या किसी केंद्रीय संस्था के फैसले के अपने आप हो जाती है।
बिना सीमा वाली कुल सप्लाई की क्रिप्टोकरेंसी
जिस तरह केंद्रीय बैंक फिएट करेंसी के साथ करते हैं, उसी तरह असीमित सप्लाई वाली क्रिप्टोकरेंसी यह नियम अपने प्रोटोकॉल में तय करती हैं। असीमित कुल सप्लाई वाली सबसे मशहूर क्रिप्टोकरेंसी Ethereum, EOS और Dogecoin हैं। Ethereum की कुल सप्लाई असीमित है, फिर भी सालाना उत्पादन पर लगी सीमा की वजह से उसकी महंगाई दर तकनीकी रूप से हर साल घटती है। मान लीजिए Ethereum की सप्लाई 10 करोड़ है और उस साल सालाना सीमा के 1 करोड़ 80 लाख ETH जारी होते हैं, तो महंगाई दर 18% होगी। जब सप्लाई 20 करोड़ हो जाएगी, तब उसी सालाना सीमा के तहत फिर 1 करोड़ 80 लाख ETH जारी होंगे, इसलिए महंगाई दर 9% रह जाएगी।
