एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग आजकल ट्रेडिंग का सबसे लोकप्रिय तरीका है, और यह मैनुअल ट्रेडिंग से ज़्यादा फ़ायदेमंद है क्योंकि इससे तेज़ और अधिक सटीक ट्रेडिंग संभव होती है।
अनुमान अवधि (2021-2026) के दौरान दुनिया भर के एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग बाज़ार के लगभग 10% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है।
इसीलिए, चाहे आप डेटा एनालिस्ट हों, रिटेल ट्रेडर हों या इंजीनियर, आजकल लगभग हर कोई एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग को समझना चाहता है। आइए, एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग सीखने की इस ललक के पाँच कारणों पर नज़र डालते हैं:
- तेज़ी से बढ़ते FinTech क्षेत्र में सपनों की नौकरी पाना
- ज़्यादा डेटा-आधारित ट्रेडिंग रणनीति बनाना
- अपना ख़ुद का एल्गो ट्रेडिंग डेस्क या कंसल्टिंग फ़र्म शुरू करना
- ट्रेडिंग से जुड़ी मैनुअल रुकावटों को कम करना
- जोखिमों को अधिक प्रभावी और आसान तरीक़े से संभालना
बढ़ते FinTech क्षेत्र में सपनों की नौकरी पाने के लिए
तेज़, सटीक और सुरक्षित प्रक्रियाओं की बदौलत FinTech दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता क्षेत्र है। एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग FinTech उद्योग की ही एक शाखा है, जो ऊँची तनख़्वाह और बोनस चाहने वालों को आकर्षित करती है।
इसी जानी-मानी वजह से बहुत से लोग एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग सीखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि इसमें क्वांटिटेटिव एनालिस्ट, क्वांटिटेटिव डेवलपर जैसी कई करियर भूमिकाएँ होती हैं।
आप चाहे जो भी भूमिका चुनें, एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग के बारे में कुछ बातें आपको समझनी चाहिए। इनमें शामिल हैं:
- कोई प्रोग्रामिंग भाषा
- वित्तीय बाज़ारों का अनुभव
- डेटा प्रबंधन
- क्वांटिटेटिव विश्लेषण
ज़्यादा डेटा-आधारित ट्रेडिंग रणनीति बनाने के लिए
डेटा-आधारित ट्रेडिंग अधिक सटीक होती है और इसमें नुक़सान का जोखिम कम रहता है। डेटा की मदद से आप ये कर सकते हैं:
- बाज़ार का ऐतिहासिक डेटा जाँचना
- ट्रेडिंग रणनीतियों का बैकटेस्ट करना
- सबसे अच्छे ट्रेड पहचानने के लिए कई वित्तीय बाज़ारों पर एक साथ नज़र रखना
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा डेटा है। डेटा विश्लेषण से वित्तीय बाज़ारों के रुझान पहचाने जा सकते हैं, जो सभी ट्रेडिंग आइडिया और रणनीति विकास की नींव रखते हैं। संक्षेप में कहें तो, डेटा वित्तीय बाज़ारों में ट्रेडिंग का ईंधन है।
इसके अलावा, ट्रेडिंग में हमेशा से बात यही रही है कि "जिसके पास डेटा तक तेज़ पहुँच है, वही आगे है।" लेकिन सिर्फ़ तेज़ पहुँच काफ़ी नहीं है; आपको डेटा प्रबंधन की समझ भी होनी चाहिए, क्योंकि दोनों ही ज़रूरी हैं।
नतीजतन, डेटा तक तेज़ पहुँच, प्रभावी डेटा प्रबंधन और डेटा के सही इस्तेमाल के साथ कोई भी व्यक्ति वित्तीय बाज़ार में दूसरों से काफ़ी आगे रहकर ट्रेड कर सकता है और बढ़त हासिल कर सकता है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस या मशीन लर्निंग की मदद से डेटा को तेज़ी से निकालकर उपयोगी जानकारी में बदला जा सकता है।
डेटा उत्पादों की पाँच श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:
- रियल-टाइम डेटा (लेवल 1, लेवल 2, लेवल 3 और टिक-बाय-टिक डेटा)
- स्नैपशॉट डेटा
- एंड ऑफ़ डे (EOD) डेटा
- कॉर्पोरेट डेटा
- ऐतिहासिक डेटा
अपना ख़ुद का ट्रेडिंग डेस्क या कंसल्टिंग फ़र्म शुरू करने के लिए
अपना ट्रेडिंग डेस्क या कंसल्टेंसी कंपनी शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग की गहरी समझ होनी चाहिए, जिसके बिना आप आगे नहीं बढ़ पाएँगे।
एक बार एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग की अच्छी समझ बन जाए, तो आप इस तरीक़े को सबसे कुशल ढंग से अपना सकेंगे। चूँकि यह एक उज्ज्वल भविष्य वाला कारोबार है, एक ट्रेडिंग डेस्क आपको बढ़त दिला सकता है।
दुनिया भर में एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग के तेज़ विकास के साथ, ट्रेडिंग डेस्क या कंसल्टिंग व्यवसाय का मालिक होना बेहद उपयोगी और मुनाफ़े का सौदा हो सकता है। हालाँकि, किसी भी दूसरे कारोबार की तरह अपना ट्रेडिंग डेस्क या कंसल्टेंसी फ़र्म खड़ी करने के लिए पूँजी, मेहनत और व्यापक विशेषज्ञता चाहिए।
साथ ही, ट्रेडर विषय की समझ और प्रदर्शन की वजह से ही ट्रेडिंग डेस्कों पर भरोसा करते हैं।
ट्रेडिंग से जुड़ी मैनुअल रुकावटों को दूर करने के लिए
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग पारंपरिक ट्रेडिंग से इसलिए आगे निकल गई है क्योंकि यह देखा गया है कि एल्गोरिदम से की गई ट्रेडिंग तेज़ और अधिक सटीक होती है, क्योंकि इसमें ग़लतियाँ कराने वाली इंसानी भावनाएँ नहीं होतीं। इसके अलावा, लेनदेन की लागत भी घट जाती है, क्योंकि एल्गोरिदम सिर्फ़ वही करते हैं जो उन्हें सिखाया गया है।
आइए देखें कि एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग कौन-कौन सी रुकावटें दूर करती है:
डर, लालच या अति-उत्साह जैसी भावनाएँ हावी नहीं होतीं।
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग में आप निश्चिंत रह सकते हैं कि रणनीति बनाते समय या ट्रेड निष्पादित करते समय भावनाओं की वजह से ग़लत फ़ैसले नहीं होंगे। एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग पूरी तरह तर्क पर आधारित है और इसका लक्ष्य मुनाफ़े को अधिकतम करना है।

लेनदेन की लागत घटाना
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग की मदद से लेनदेन की लागत न्यूनतम हो जाती है, क्योंकि एल्गोरिदम भावनात्मक प्रभावों में आकर थोड़े-थोड़े समय में एक ट्रेड से दूसरे ट्रेड पर नहीं कूदते। नतीजतन, एल्गोरिदम ठीक उसी तरह काम करता है जैसा उसे बताया गया है।

ट्रेडिंग में समय प्रबंधन
समय बचाने की बात हो तो एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग सबसे बढ़िया विकल्प है, क्योंकि यह एक साथ कई वित्तीय बाज़ारों पर नज़र रखती है और उनमें ट्रेड करती है। एल्गोरिदम बदलती बाज़ार परिस्थितियों, रुझानों और स्टॉप लॉस, स्टॉप लिमिट जैसे निर्देशों के आधार पर ट्रेड निष्पादित करते हैं।

यह भविष्य के लिए तैयार होने में मदद करती है।
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग भविष्य के लिए तैयार रहने का शानदार ज़रिया है, क्योंकि जैसा हमने बताया, एल्गोरिथमिक ट्रेडर समय के साथ कितनी तेज़ी से ताक़तवर होते जा रहे हैं।

जोखिमों को अधिक प्रभावी और आसान तरीक़े से संभालने के लिए
शेयर बाज़ार के सौदों से होने वाले नुक़सान के ख़तरे से बचने के लिए ट्रेडिंग का जोखिम प्रबंधन बेहद ज़रूरी है। जोखिम प्रबंधन में उन जोखिमों की पहचान, आकलन और उन्हें कम करना शामिल है, जो अक्सर तब पैदा होते हैं जब बाज़ार उम्मीदों के उलट दिशा में चलता है।
इसलिए ज़रूरी है कि आप अपनी उम्मीदें व्यापक बाज़ार शोध पर आधारित रखें और सभी ख़तरों का पहले से अनुमान लगा लें।
एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग की मदद से जोखिम प्रबंधन के ये तरीक़े अपनाए जा सकते हैं:
पोर्टफ़ोलियो ऑप्टिमाइज़ेशन
पोर्टफ़ोलियो ऑप्टिमाइज़ेशन का मतलब है अलग-अलग निवेश आवंटन वाले पोर्टफ़ोलियो की जाँच करना। हर पोर्टफ़ोलियो के जोखिम और रिटर्न का आकलन करके निवेश का अनुकूलन किया जाता है।
उदाहरण के लिए, किसी पोर्टफ़ोलियो का विश्लेषण शार्प रेशियो से किया जा सकता है, जो पोर्टफ़ोलियो के हर निवेश के लिए उठाए गए अतिरिक्त जोखिम की तुलना में मिलने वाले अतिरिक्त रिटर्न की गणना करता है।
इस तरह पोर्टफ़ोलियो को इस प्रकार अनुकूलित किया जा सकता है कि ऊँचे शार्प रेशियो वाले शेयर, कम शार्प रेशियो वाले शेयरों से अधिक रहें।
हेजिंग
हेजिंग एक निवेश तकनीक है, जिसका इस्तेमाल संभावित नुक़सान यानी भविष्य में क़ीमतों के बदलाव की भरपाई के लिए किया जाता है। हेजिंग के लिए बीमा, फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, स्वैप, ऑप्शंस जैसे वित्तीय उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी कमोडिटी बाज़ार में ग्रेड A चावल के फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का लेनदेन होता है, जिसमें हर कॉन्ट्रैक्ट 100 किलोग्राम का होता है। मणि महीने के आख़िरी हफ़्ते में 5,000 किलोग्राम ग्रेड A चावल ख़रीदना चाहते हैं, जबकि रसेल उसी हफ़्ते 5,000 किलोग्राम ग्रेड A चावल बेचना चाहते हैं।
ऐसे में फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट दोनों पक्षों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि बाज़ार में दोनों पक्षों के बीच 50 कॉन्ट्रैक्ट का सौदा पूरा हो सकता है।
1% नियम और 2% निवेश नियम
1% और 2% ट्रेडिंग नियम कहते हैं कि किसी एक सौदे में लिया जाने वाला अधिकतम जोखिम 1% या 2% ही होना चाहिए। इससे आप उस भारी नुक़सान से बच जाते हैं, जो अन्यथा हो सकता था।
उदाहरण के लिए, अस्थिरता के मापक बीटा का इस्तेमाल करके, अगर किसी शेयर में निवेश का जोखिम 2% से ज़्यादा हो तो ट्रेड करने से बचा जा सकता है।
अत्याधुनिक तकनीकों से वित्तीय बाज़ारों पर नज़र रखना
सबसे अच्छे ट्रेडिंग अवसर खोजने के लिए ट्रेडों पर मशीन लर्निंग जैसी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से नज़र रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए, मशीन लर्निंग तकनीकों की मदद से एल्गोरिदम विभिन्न वित्तीय बाज़ारों और वित्तीय संपत्तियों पर नज़र रखते हैं, ताकि सबसे मुनाफ़े वाले ट्रेडिंग अवसर पहचाने जा सकें।
अस्पष्ट ट्रेड सेटअप से बचना
जब आप EMA, MA जैसे मूविंग इंडिकेटर इस्तेमाल करते हैं और उनमें से कोई एक साफ़ ट्रेड सेटअप दिखाता है, लेकिन वह दूसरे इंडिकेटरों के ट्रेड सेटअप से मेल नहीं खाता, तो असमंजस पैदा होता है।
ऐसी स्थिति में सही सौदे का इंतज़ार करना और अनिश्चित होने पर कोई भी फ़ैसला न लेना ही समझदारी है। उदाहरण के लिए, अगर EMA का संकेत MA से मेल नहीं खाता, तो ट्रेड में उतरने से पहले सही ट्रेडिंग परिस्थिति का इंतज़ार करना चाहिए।
स्टॉप लॉस
स्टॉप लॉस ऑर्डर ऐसा ख़रीद या बिक्री ऑर्डर है, जो शेयर की क़ीमत के पहले से तय क़ीमत — जिसे स्टॉप प्राइस कहते हैं — पर पहुँचते ही सक्रिय हो जाता है। इससे ट्रेडर को बाज़ार पर लगातार नज़र रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
उदाहरण के लिए, अगर आपने XYZ शेयर 50 डॉलर प्रति शेयर पर ख़रीदा है और आपको इसकी क़ीमत गिरने की चिंता है, तो आप स्टॉप लॉस ऑर्डर का इस्तेमाल कर सकते हैं। क़ीमत एक निश्चित स्तर से नीचे जाते ही स्टॉप लॉस ऑर्डर संकेत दे सकता है कि बेचने का समय आ गया है। मान लीजिए आपने क़ीमत 45 डॉलर प्रति शेयर तय की; इससे नीचे जाते ही एल्गोरिदम बड़े नुक़सान से बचने के लिए उस संपत्ति को बेच देगा।
निष्कर्ष
इस लेख का मक़सद बस उन पाँच सबसे अहम कारणों को सामने रखना था, जिनकी वजह से एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग आजकल लोकप्रिय होती जा रही है। साथ ही, यह लेख आपको यह भी बताना चाहता था कि यह परिष्कृत ट्रेडिंग पद्धति पारंपरिक मैनुअल ट्रेडिंग से किस तरह अलग है।
अगर आप एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग सीखना चाहते हैं, तो Hafizebot की गाइड देख सकते हैं।
