मेटावर्स को चलाने वाली 7 प्रमुख तकनीकें

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मेटावर्स एक 3D डिजिटल दुनिया का विचार है। यह ऐसे वर्चुअल स्पेस से बनी होती है जिन्हें आप अपने अवतार के ज़रिए घूम सकते हैं। मेटावर्स में आप गेम खेल सकते हैं, शॉपिंग कर सकते हैं, वर्चुअल कैफ़े में दोस्तों से मिल सकते हैं, वर्चुअल ऑफ़िस में सहकर्मियों के साथ काम कर सकते हैं और भी बहुत कुछ। मेटावर्स के कुछ तत्व तो पहले ही कई वीडियो गेम्स के इकोसिस्टम और दफ़्तर में मेलजोल के टूल्स में शामिल हो चुके हैं।

Decentraland और The Sandbox जैसे क्रिप्टो प्रोजेक्ट अपनी डिजिटल दुनिया लॉन्च कर चुके हैं। लेकिन चूँकि मेटावर्स की अवधारणा अभी शुरुआती दौर में है, इसकी ज़्यादातर सुविधाएँ अब भी बन रही हैं। Facebook (अब Meta), Microsoft और Nvidia जैसी कंपनियों ने भी अपने-अपने मेटावर्स बनाने शुरू कर दिए हैं।

तकनीकी कंपनियाँ इस 3D दुनिया के विकास को गति देने और एक इमर्सिव वर्चुअल अनुभव देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपना रही हैं। ब्लॉकचेन, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR), 3D रिकंस्ट्रक्शन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) ऐसी ही तकनीकों के उदाहरण हैं।

मेटावर्स क्या है?

मेटावर्स एक ऑनलाइन 3D डिजिटल दुनिया है, जिसमें वर्चुअल ज़मीन और वस्तुएँ होती हैं। कल्पना कीजिए कि आप घर बैठे रिमोट काम कर रहे हैं, नई कलाकृतियाँ देखने वर्चुअल म्यूज़ियम जा रहे हैं, या अपने पसंदीदा रॉक बैंड के बाकी फ़ैन्स के साथ वर्चुअल कॉन्सर्ट में शामिल हो रहे हैं।

Axie Infinity, The Sandbox और Decentraland ने हमारी ज़िंदगी के अलग-अलग हिस्सों को ऑनलाइन दुनिया में लाने के लिए मेटावर्स के तत्व पहले ही जोड़ लिए हैं। दूसरी ओर, मेटावर्स खुद अभी बन ही रहा है। किसी को नहीं पता कि आगे चलकर एक ही सर्वव्यापी मेटावर्स होगा या कई मेटावर्स, जिनके बीच आप आ-जा सकेंगे।

जैसे-जैसे यह विचार विकसित होगा, यह वीडियो गेम्स और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से कहीं आगे बढ़ेगा। रिमोट वर्किंग, विकेंद्रीकृत गवर्नेंस और डिजिटल पहचान — ये मेटावर्स की कुछ ही संभावित खूबियाँ हैं। कनेक्टेड VR हेडसेट और चश्मों के साथ यह और भी बहुआयामी हो सकता है, जिससे उपयोगकर्ता शारीरिक रूप से चलकर 3D स्पेस घूम सकेंगे।

मेटावर्स में हालिया विकास

अक्टूबर 2021 में Facebook का नाम बदलकर Meta होने के बाद मेटावर्स नया चर्चित शब्द बन गया। रीब्रांडिंग की तैयारी में इस सोशल मीडिया दिग्गज ने 2021 तक Reality Labs नाम के नए डिवीज़न में 10 अरब डॉलर निवेश किए। योजना है मेटावर्स के लिए कंटेंट, सॉफ़्टवेयर और AR व VR हेडसेट बनाना — CEO मार्क ज़करबर्ग का मानना है कि आगे चलकर ये स्मार्टफ़ोन जितने आम हो जाएँगे।

कोविड-19 महामारी ने भी मेटावर्स बनाने में दिलचस्पी बढ़ाई है। जितने ज़्यादा लोग रिमोट काम कर रहे हैं, दूसरों से जुड़ने के ज़्यादा इंटरैक्टिव तरीकों की माँग उतनी ही बढ़ी है। ऐसे वर्चुअल 3D स्पेस जहाँ सहकर्मी मीटिंग में शामिल हों, बातचीत करें और साथ काम करें, तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। एक उदाहरण Microsoft Mesh है, जिसे नवंबर 2021 में पेश किया गया। इसमें ऐसे इमर्सिव स्पेस हैं जहाँ लोग अपने अवतार के ज़रिए मिलते-जुलते और मिलकर काम करते हैं, जिससे रिमोट टीम की मीटिंग ज़्यादा जीवंत और मज़ेदार बनती है।

कुछ ऑनलाइन गेम भी मेटावर्स को अपना रहे हैं। ऑगमेंटेड रियलिटी वाला मोबाइल गेम Pokémon Go इस विचार को भुनाने वालों में सबसे पहले था — खिलाड़ी स्मार्टफ़ोन ऐप से असली दुनिया में वर्चुअल पोकेमॉन का शिकार कर सकते थे। एक और लोकप्रिय गेम Fortnite ने अपनी डिजिटल दुनिया में ब्रांड इवेंट और कॉन्सर्ट जैसी कई गतिविधियाँ जोड़ी हैं।

सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म के अलावा Nvidia जैसी तकनीकी कंपनियों ने भी वर्चुअल दुनिया में नए अवसर खोले हैं। Nvidia Omniverse एक ओपन प्लेटफ़ॉर्म है जो 3D स्पेस को एक साझा ब्रह्मांड में जोड़ता है, ताकि इंजीनियर, डिज़ाइनर और क्रिएटर वर्चुअली मिलकर काम कर सकें। यह इस समय कई उद्योगों में इस्तेमाल हो रहा है। मिसाल के तौर पर, BMW ग्रुप स्मार्ट मैन्युफ़ैक्चरिंग के ज़रिए उत्पादन समय घटाने और उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने के लिए Omniverse का उपयोग कर रहा है।

मेटावर्स को चलाने वाली मुख्य तकनीकें

मेटावर्स के अनुभव को और इमर्सिव बनाने के लिए कंपनियाँ इस 3D दुनिया को ब्लॉकचेन, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR), 3D रिकंस्ट्रक्शन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से ताक़त दे रही हैं।

ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी

ब्लॉकचेन तकनीक मालिकाना हक़ का विकेंद्रीकृत और पारदर्शी डिजिटल प्रमाण, डिजिटल कलेक्टिबिलिटी, मूल्य का हस्तांतरण, गवर्नेंस, पहुँच और इंटरऑपरेबिलिटी संभव बनाती है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्ताओं को इस 3D डिजिटल दुनिया में काम करते और मेलजोल करते हुए मूल्य का आदान-प्रदान करने देती है।

उदाहरण के लिए, Decentraland में वर्चुअल ज़मीन खरीदने के लिए क्रिप्टो का इस्तेमाल किया जा सकता है। खिलाड़ी गेम की क्रिप्टोकरेंसी MANA से 16x16 मीटर के प्लॉट नॉन-फ़ंजिबल टोकन (NFT) के रूप में खरीद सकते हैं। इन वर्चुअल ज़मीनों का मालिकाना हक़ ब्लॉकचेन तकनीक की मदद से दर्ज और सुरक्षित किया जा सकता है।

आगे चलकर क्रिप्टो का इस्तेमाल लोगों को मेटावर्स में काम करने के लिए प्रोत्साहित करने में हो सकता है। जैसे-जैसे ज़्यादा कंपनियाँ रिमोट वर्किंग के लिए अपने दफ़्तर ऑनलाइन ले जाएँगी, हमें मेटावर्स से जुड़ी नौकरियों के विज्ञापन भी दिख सकते हैं।

ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR)

ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) हमें इमर्सिव और दिलचस्प 3D अनुभव दे सकती हैं। ये वर्चुअल दुनिया में हमारे प्रवेश-द्वार हैं। लेकिन AR और VR में फ़र्क़ क्या है?

AR असली दुनिया में डिजिटल विज़ुअल तत्व और किरदार जोड़कर उसे बदल देती है। यह VR के मुक़ाबले कम भारी-भरकम है और कैमरे वाले लगभग किसी भी स्मार्टफ़ोन या डिजिटल डिवाइस पर चल जाती है। AR ऐप्स उपयोगकर्ताओं को अपने आसपास का माहौल इंटरैक्टिव डिजिटल ग्राफ़िक्स के साथ दिखाते हैं — ठीक मोबाइल गेम Pokémon GO की तरह। जब खिलाड़ी फ़ोन का कैमरा खोलते हैं, तो उन्हें असली दुनिया में पोकेमॉन दिखाई देते हैं।

VR अलग तरह से काम करती है। यह पूरी तरह कंप्यूटर से बनी वर्चुअल दुनिया रचती है, जो मेटावर्स की अवधारणा से काफ़ी मिलती-जुलती है। उपयोगकर्ता फिर VR हेडसेट, दस्तानों और सेंसर से इसे घूम सकते हैं।

AR और VR के काम करने का तरीक़ा मेटावर्स का शुरुआती मॉडल दिखाता है। VR काल्पनिक विज़ुअल कंटेंट जोड़कर डिजिटल दुनिया को अभी से बदल रही है। जैसे-जैसे यह तकनीक परिपक्व होगी, VR उपकरणों के ज़रिए मेटावर्स के अनुभव को भौतिक सिमुलेशन तक बढ़ाने की क्षमता इसमें है। उपयोगकर्ता दुनिया भर के लोगों को महसूस कर सकेंगे, सुन सकेंगे और उनसे बातचीत कर सकेंगे। मेटावर्स के इर्द-गिर्द चल रहे उत्साह को देखते हुए उम्मीद की जा सकती है कि नज़दीकी भविष्य में और भी कंपनियाँ AR व VR उपकरणों के विकास में निवेश करेंगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

पिछले कुछ सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने लगा है — कारोबारी रणनीति बनाने, फ़ैसले लेने, चेहरा पहचानने, तेज़ कंप्यूटिंग और बहुत कुछ में। हाल ही में AI विशेषज्ञ इस पर शोध कर रहे हैं कि इमर्सिव मेटावर्स बनाने में AI का इस्तेमाल कैसे किया जाए।

AI बेहद तेज़ रफ़्तार से विशाल मात्रा में डेटा प्रोसेस कर सकता है। मशीन लर्निंग तकनीकों के साथ मिलकर AI एल्गोरिदम पिछले दोहरावों से सीखते हैं और ऐतिहासिक डेटा को ध्यान में रखते हुए अनोखे नतीजे और अंतर्दृष्टि तैयार करते हैं।

मेटावर्स के भीतर अलग-अलग परिस्थितियों में AI को नॉन-प्लेयर करैक्टर (NPC) पर लागू किया जा सकता है। NPC लगभग हर गेम में होते हैं; ये गेमिंग माहौल का वह हिस्सा हैं जो खिलाड़ी की गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देता है। AI की प्रोसेसिंग क्षमता की मदद से NPC को 3D स्पेस में रखा जा सकता है, ताकि वे उपयोगकर्ताओं से जीवंत बातचीत करें या कोई ख़ास काम करें। इंसानी उपयोगकर्ता के उलट, AI वाला NPC अपने आप चल सकता है और एक ही समय में लाखों खिलाड़ियों के साथ काम कर सकता है। यह कई भाषाओं में भी काम कर सकता है।

मेटावर्स के अवतार बनाना AI का एक और संभावित उपयोग है। ज़्यादा यथार्थवादी और सटीक अवतार बनाने के लिए AI इंजन 2D तस्वीरों या 3D स्कैन का विश्लेषण कर सकते हैं। AI अलग-अलग चेहरे के भाव, हेयरस्टाइल, कपड़े और नैन-नक़्श भी बना सकता है, जिससे हमारे बनाए डिजिटल इंसान और बेहतर बनते हैं और यह प्रक्रिया ज़्यादा जीवंत हो जाती है।

3D रिकंस्ट्रक्शन

यह कोई नई तकनीक नहीं है, लेकिन महामारी के दौरान इसका इस्तेमाल बढ़ा — ख़ासकर रियल एस्टेट में, जहाँ लॉकडाउन की वजह से संभावित खरीदार खुद जाकर प्रॉपर्टी नहीं देख पा रहे थे। नतीजतन कुछ एजेंसियों ने वर्चुअल प्रॉपर्टी टूर बनाने के लिए 3D रिकंस्ट्रक्शन तकनीक का सहारा लिया। खरीदार कहीं से भी अपने संभावित नए घर को देख सकते थे और वहाँ क़दम रखे बिना ही सौदा कर सकते थे — ठीक उसी मेटावर्स की तरह जिसकी हम कल्पना करते हैं।

मेटावर्स की एक चुनौती ऐसा डिजिटल माहौल बनाना है जो जितना हो सके उतना असली दिखे। 3D रिकंस्ट्रक्शन से यथार्थवादी और स्वाभाविक दिखने वाले स्पेस बनाना मुमकिन है। ख़ास 3D कैमरों से इमारतों, असली जगहों और वस्तुओं के सटीक फ़ोटोरियलिस्टिक 3D मॉडल तैयार करके हम अपनी दुनिया को ऑनलाइन ला सकते हैं। फिर 3D स्थानिक डेटा और 4K HD तस्वीरें कंप्यूटर में डाली जाती हैं, जो उन्हें प्रोसेस करके मेटावर्स में एक वर्चुअल प्रतिकृति बनाते हैं, जिसे उपयोगकर्ता अनुभव कर सकें। असली वस्तुओं की इन वर्चुअल प्रतिकृतियों को डिजिटल ट्विन भी कहा जाता है।

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT)

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) की अवधारणा पहली बार 1999 में सामने आई थी। सीधे शब्दों में, IoT एक ऐसा सिस्टम है जो सेंसर और डिवाइस के ज़रिए हमारी भौतिक दुनिया की हर चीज़ को इंटरनेट से जोड़ता है। इंटरनेट से जुड़ने के बाद इन डिवाइस को एक विशिष्ट पहचानकर्ता मिलता है और ये अपने आप डेटा भेजने-लेने में सक्षम हो जाते हैं। आज IoT थर्मोस्टैट, वॉइस स्पीकर, मेडिकल डिवाइस और दूसरे उपकरणों को तरह-तरह के डेटा स्रोतों से जोड़ता है।

मेटावर्स में IoT का एक उपयोग भौतिक दुनिया से डेटा जुटाना और बाँटना है। इससे डिजिटल प्रतिरूपों की सटीकता बेहतर होगी। मसलन, IoT डेटा फ़ीड मौजूदा मौसम या दूसरी परिस्थितियों के हिसाब से मेटावर्स की कुछ वस्तुओं का व्यवहार बदल सकते हैं।

IoT लागू करने से 3D दुनिया को असली दुनिया के ढेरों डिवाइस से जोड़ा जा सकता है। इससे रियल-टाइम मेटावर्स सिमुलेशन बनाना संभव होता है। जुटाए गए डेटा को संभालने और मेटावर्स के माहौल को और बेहतर बनाने के लिए IoT, AI और मशीन लर्निंग का सहारा ले सकता है।

मेटावर्स की चुनौतियाँ

मेटावर्स अभी अपने शुरुआती चरण में है। पहचान की पुष्टि और निजता का नियंत्रण इसकी चुनौतियों के दो उदाहरण हैं। असली दुनिया में किसी को पहचानना आमतौर पर मुश्किल नहीं होता। लेकिन जब लोग अपने अवतार लेकर वर्चुअल दुनिया में घूमेंगे, तो सामने वाला कौन है, यह बताना या साबित करना कठिन होगा। मिसाल के तौर पर, बदनीयत लोग या बॉट किसी और की पहचान लेकर मेटावर्स में घुस सकते हैं। फिर वे इसका फ़ायदा उठाकर उस व्यक्ति की साख को नुकसान पहुँचा सकते हैं या दूसरे उपयोगकर्ताओं से ठगी कर सकते हैं।

दूसरा मुद्दा निजता का है। इमर्सिव अनुभव देने के लिए मेटावर्स AR और VR डिवाइस पर निर्भर करता है। कैमरे और विशिष्ट पहचानकर्ता वाली ये तकनीकें आगे चलकर निजी जानकारी के अनचाहे लीक की वजह बन सकती हैं।

आख़िरी बात

मेटावर्स भले ही अभी शुरुआती दौर में हो, कई कंपनियाँ इसकी संभावनाएँ तलाशने लगी हैं। क्रिप्टो जगत में Decentraland और The Sandbox उल्लेखनीय प्रोजेक्ट हैं, लेकिन Microsoft, Nvidia और Facebook जैसी बड़ी कंपनियाँ भी इसमें उतर रही हैं। जैसे-जैसे AR, VR और AI तकनीकें आगे बढ़ेंगी, इन सरहद-रहित वर्चुअल दुनियाओं में हमें दिलचस्प नई सुविधाएँ देखने को मिलेंगी।