Bitcoin नेटवर्क के कुछ crypto wallets यूज़र्स को अपनी ट्रांज़ैक्शन फ़ीस ख़ुद तय करने देते हैं। BTC बिना कोई फ़ीस दिए भी भेजा जा सकता है, लेकिन संभावना यही है कि माइनर्स ऐसी ट्रांज़ैक्शन को नज़रअंदाज़ कर देंगे और वह कभी वेरिफ़ाई नहीं होगी।
कुछ लोग जो समझते हैं उसके उलट, बिटकॉइन की फ़ीस भेजी गई रकम से नहीं, बल्कि ट्रांज़ैक्शन के साइज़ (bit में) से तय होती है। मान लीजिए आपकी ट्रांज़ैक्शन का साइज़ 400 bit है और औसत फ़ीस इस समय 80 satoshi प्रति bit है। ऐसे में आपकी ट्रांज़ैक्शन के अगले ब्लॉक में शामिल होने की अच्छी संभावना बनाने के लिए आपको क़रीब 32,000 satoshi (यानी 0.00032 BTC) चुकाने होंगे।
जब नेटवर्क पर ट्रैफ़िक ज़्यादा होता है और BTC भेजने की मांग बढ़ जाती है, तो तेज़ कन्फ़र्मेशन के लिए देनी पड़ने वाली फ़ीस भी बढ़ जाती है, क्योंकि बाक़ी बिटकॉइन यूज़र्स भी यही करने की कोशिश कर रहे होते हैं। बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव के दौर में यह स्थिति आम है।
इसीलिए ऊंची ट्रांज़ैक्शन फ़ीस BTC को रोज़मर्रा के लेन-देन में इस्तेमाल करना मुश्किल बना देती है। 3 डॉलर की एक कप कॉफ़ी के लिए उससे कई गुना ज़्यादा फ़ीस चुकाना समझदारी नहीं होगी।
1 MB की लिमिट (ब्लॉक साइज़) वाले एक ब्लॉक में सीमित संख्या में ही ट्रांज़ैक्शन आ सकती हैं। माइनर्स इन ब्लॉक्स को जितनी जल्दी हो सके ब्लॉकचेन में जोड़ते हैं, लेकिन इस रफ़्तार की भी एक सीमा है।
नेटवर्क फ़ीस तय होने में क्रिप्टो नेटवर्क की स्केलेबिलिटी की बड़ी भूमिका है, और ब्लॉकचेन डेवलपर्स लगातार इस समस्या को हल करने में जुटे हैं। SegWit और Lightning Network जैसे नेटवर्क अपडेट्स से स्केलिंग पहले ही बेहतर हुई है।
