स्पॉट मार्केट क्या है?

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जिन बाज़ारों में कोई वित्तीय इंस्ट्रूमेंट सीधे खरीदा और बेचा जाता है, उन्हें स्पॉट मार्केट कहते हैं। स्पॉट मार्केट में कीमत उस वित्तीय एसेट के मौजूदा भाव के आधार पर बनती है। इस लेख में आपको इस सवाल का जवाब मिलेगा कि स्पॉट मार्केट क्या है।

स्पॉट मार्केट वह बाज़ार है जहाँ वित्तीय प्रोडक्ट तुरंत और नकद के ज़रिए ट्रेड किए जाते हैं। स्पॉट मार्केट में होने वाले सौदों को स्पॉट ट्रांज़ैक्शन कहा जाता है। स्पॉट ट्रांज़ैक्शन के दौरान खरीदार और विक्रेता सिर्फ़ उन्हीं एसेट का इस्तेमाल कर सकते हैं जो वाकई उनके पास मौजूद हैं। इसमें न लेवरेज लगता है और न ही मार्जिन ट्रेडिंग।

किसी केंद्रीय अथॉरिटी के अंतर्गत होने वाले स्पॉट सौदों पर कमीशन लिया जाता है और इन सौदों को तय कानूनों के ज़रिए सुरक्षित करने की कोशिश की जाती है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफ़ॉर्म पर होने वाले स्पॉट सौदे ब्लॉकचेन पर दर्ज होते हैं। ये ट्रांज़ैक्शन अनाम तो होते हैं, लेकिन गोपनीय नहीं।

स्पॉट मार्केट कैसे काम करते हैं?

स्पॉट मार्केट शब्द का मतलब पारंपरिक वित्तीय बाज़ारों और क्रिप्टो बाज़ारों, दोनों में एक ही है। स्पॉट मार्केट की कीमतें संबंधित क्रिप्टो एसेट की मौजूदा वैल्यू पर आधारित होती हैं। हालाँकि, क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर दिए गए ऑर्डर के एग्ज़ीक्यूशन के दौरान कीमतें पल-पल बदलती रहती हैं, और ऑर्डर के प्रकार के हिसाब से सौदे की कीमत भी बदल सकती है।

स्पॉट और फ्यूचर्स मार्केट में क्या अंतर है?

स्पॉट मार्केट के उलट फ्यूचर्स तुरंत निपटने वाले नहीं होते। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में कॉन्ट्रैक्ट के तहत भुगतान किसी भविष्य की तारीख को होता है। खरीदार और विक्रेता बेचे जा रहे वित्तीय एसेट की रकम तय करते हैं और उसे आगे की किसी तारीख पर चुकाने का फ़ैसला करते हैं। भुगतान उसी तय तारीख को किया जाता है।