पीयर टू पीयर (P2P) क्या है? P2P नेटवर्क कैसे काम करता है?

· 2 min read

पीयर-टू-पीयर तरीके से डेटा भेजना सॉफ़्टवेयर की दुनिया में कई अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन क्रिप्टो बाज़ार में इसे असली मायने बिटकॉइन के व्हाइटपेपर के शीर्षक और उसकी विषयवस्तु से मिले। 31 अक्टूबर 2008 को सातोशी नाकामोतो ने एक क्रिप्टोग्राफ़ी मेलिंग ग्रुप को भेजे ई-मेल में “Bitcoin: Peer-to-Peer Electronic Cash System” नाम की ऑनलाइन पेमेंट विधि पेश की। बिटकॉइन व्हाइटपेपर में ब्लॉकचेन की तकनीकी बारीकियाँ बताने वाले नाकामोतो ने ऐसा भरोसेमंद ऑनलाइन पेमेंट तरीका सुझाया जिसमें किसी केंद्रीय संस्था पर भरोसा करने की ज़रूरत ही न पड़े।

इस लेख में आपको इस सवाल का जवाब मिलेगा कि पीयर टू पीयर (P2P), यानी सीधे एक यूज़र से दूसरे यूज़र तक लेन-देन, आख़िर है क्या।

पीयर टू पीयर (P2P) क्या है?

पीयर टू पीयर (P2P) का मतलब है यूज़र्स के बीच सीधे डेटा साझा करना, बिना किसी तीसरे पक्ष के — जैसे कोई सेंट्रल सर्वर। बिटकॉइन ब्लॉकचेन के विकेंद्रीकरण की बात करते समय यही कहा जाता है कि लेन-देन इसी तरह, एक पीयर से दूसरे पीयर तक होते हैं। बीच में या केंद्र में कोई सरकार, कंपनी, व्यक्ति या संस्था जैसा केंद्रीय तत्व सीधे जुड़ा नहीं होता, बल्कि लेन-देन की पूरी व्यवस्था नेटवर्क में बँटी होती है। डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क ढाँचा ऐसा सिस्टम है जिसमें नेटवर्क पर मौजूद कई डिवाइस आपस में सीधे डेटा का आदान-प्रदान करते हैं।

क्या पीयर टू पीयर (P2P) सुरक्षित है?

केंद्रीय तत्व की ज़रूरत इसलिए भी पैदा हुई थी क्योंकि वह किसी न किसी बिंदु पर भरोसा देता है और नियंत्रण रखता है। ब्लॉकचेन के साथ किसी को किसी और को जानने या उस पर भरोसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ब्लॉकचेन से जुड़े हर व्यक्ति के पास एक डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर होता है जिसमें बिल्कुल वही लेन-देन दर्ज होते हैं। अगर सिर्फ़ एक व्यक्ति के लेजर, यानी उसके कंप्यूटर पर मौजूद ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के डेटा से छेड़छाड़ हो जाए या उस पर साइबर हमला हो जाए, तब भी नेटवर्क के बहुमत सदस्य इस बदलाव को ख़ारिज कर सकते हैं, क्योंकि बाक़ी सबके पास वही रिकॉर्ड मौजूद हैं। इसी वजह से कहा जा सकता है कि पीयर-टू-पीयर ट्रांसफ़र की सुविधा देने वाला ब्लॉकचेन सुरक्षित है।

पीयर टू पीयर नेटवर्क कैसे काम करते हैं

पीयर टू पीयर का मतलब है दो यूज़र्स के बीच सीधे डेटा का हस्तांतरण। इसीलिए यूज़र्स न किसी सेंट्रल सर्वर से जुड़ते हैं और न ही ऐसे सिस्टम से जिसका रास्ता अनिवार्य रूप से किसी केंद्रीय संस्था से होकर गुज़रता हो। वे उस डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को चलाने वाले प्रोटोकॉल के ज़रिए आपस में सीधे संवाद करते हैं।

बिटकॉइन ब्लॉकचेन भी एक पीयर-टू-पीयर (P2P) सिस्टम है, जो यूज़र्स को बिना किसी केंद्रीय संस्था के आपस में पैसा भेजने की सुविधा देता है। यूज़र्स एन्क्रिप्टेड बिटकॉइन ट्रांसफ़र करते हैं, सभी लेन-देन डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में दर्ज होते हैं, और बिटकॉइन ब्लॉकचेन नेटवर्क से जुड़े यूज़र्स इन लेजर में मौजूद रिकॉर्ड की सत्यता जाँचते हैं।