सपोर्ट और रेजिस्टेंस टेक्निकल एनालिसिस के वे कॉन्सेप्ट हैं जिनसे कीमत के निचले स्तर और ऊपरी शिखर बताए जाते हैं। क्रिप्टोकरेंसी की प्राइस एनालिसिस में भी इनका इस्तेमाल खूब होता है। माना जाता है कि सपोर्ट लेवल के बाद कीमतें और नीचे नहीं जाएंगी, जबकि रेजिस्टेंस लेवल पर उम्मीद यह होती है कि कीमतें और ऊपर नहीं चढ़ेंगी।
सपोर्ट और रेजिस्टेंस क्या है?
सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल बाजार में निवेशकों के व्यवहार के नतीजे के तौर पर अपने आप बनते हैं। इन्हें शॉर्ट, मीडियम या लॉन्ग टर्म — किसी भी अवधि में ट्रैक किया जा सकता है। चार्ट के इतिहास में कीमतों की चाल को पकड़कर ये लेवल तय किए जाते हैं। माना जाता है कि कीमत इस स्तर को पार नहीं कर पाएगी।
सपोर्ट लेवल चार्ट पर उस बिंदु को दर्शाता है जहाँ कीमतें सबसे नीचे होती हैं। गिरते हुए चार्ट से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह सपोर्ट के बाद भी गिरता रहेगा। दूसरे शब्दों में, सपोर्ट कीमतों को और नीचे जाने से रोकता है। सपोर्ट पर पहुँचते ही बिकवाली थम जाती है, क्योंकि कीमत सबसे निचले स्तर पर हो तो निवेशक अपनी क्रिप्टोकरेंसी बेचना पसंद नहीं करते। बेचने के लिए वे कीमत के ऊपर चढ़ने का इंतज़ार करते हैं।
यह कहा जा सकता है कि जब सपोर्ट टूटता है, तो वही बिंदु नया रेजिस्टेंस बन जाता है। इसी के चलते सपोर्ट टूटने पर कीमतें गिरती रहती हैं। उम्मीद की जाती है कि नए सपोर्ट और रेजिस्टेंस बनने तक चार्ट पर गिरावट जारी रहेगी।
रेजिस्टेंस को सपोर्ट का उल्टा समझा जा सकता है। रेजिस्टेंस वह बिंदु है जहाँ चढ़ते हुए चार्ट में तेज़ी खत्म होती है। यह छत की तरह काम करता है और कीमतों को ऊपर जाने से रोकता है। रेजिस्टेंस पर पहुँचने के बाद कीमतों के और चढ़ने की उम्मीद नहीं रहती। इस बिंदु पर संबंधित क्रिप्टो एसेट की खरीदारी ठप पड़ जाती है, क्योंकि मान लिया जाता है कि कीमत अपने शिखर पर है। खरीदने का फैसला लेने के लिए निवेशक कीमत गिरने का इंतज़ार करते हैं।
जब रेजिस्टेंस टूटता है, तो वह बिंदु नया सपोर्ट बन जाता है। रेजिस्टेंस टूटने के बाद उम्मीद रहती है कि कीमतें इस बिंदु से ऊपर चढ़ेंगी। इसीलिए माना जाता है कि खरीदारी बढ़ेगी।
क्रिप्टो एनालिसिस में सपोर्ट और रेजिस्टेंस का इस्तेमाल कैसे करें
जिस क्रिप्टो एसेट में दिलचस्पी हो, उसके शॉर्ट, मीडियम या लॉन्ग टर्म चार्ट पढ़कर सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल निकाले जा सकते हैं। किसी क्रिप्टोकरेंसी चार्ट की ऐतिहासिक चाल के हिसाब से कीमतों के तल और शिखर तय किए जा सकते हैं। बिटकॉइन या क्रिप्टो निवेशकों के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस पहचानना उन मददगार चीज़ों में से एक है, जिनसे यह तय करने में आसानी होती है कि किन स्तरों पर खरीदना या बेचना है।
सपोर्ट और रेजिस्टेंस के प्रकार
अलग-अलग चार्ट के सपोर्ट और रेजिस्टेंस कई तरीकों से तय किए जा सकते हैं। इन्हें पहचानने के लिए कुछ उपयोगी तरीके हैं। मूविंग एवरेज, फिबोनाची और ट्रेंडलाइन आधारित सपोर्ट-रेजिस्टेंस इन्हीं में से कुछ हैं।
मूविंग एवरेज सपोर्ट और रेजिस्टेंस
मूविंग एवरेज सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल ढूँढ़ने का एक इंडिकेटर है। मूविंग एवरेज इंडिकेटर एक तय समयावधि की कीमतों का औसत निकालकर बनाया जाता है। मूविंग एवरेज में ऊपर की ओर रुझान दिखे तो उससे रेजिस्टेंस तय किया जा सकता है, जबकि नीचे की ओर रुझान से सपोर्ट तय किया जा सकता है।
फिबोनाची सपोर्ट और रेजिस्टेंस
फिबोनाची सीरीज़ टेक्निकल एनालिसिस में इस्तेमाल होने वाले गणितीय कॉन्सेप्ट में से एक है। फिबोनाची सीरीज़ पर बने चार्ट में गोल्डन रेशियो तक पहुँचने की उम्मीद की जाती है। फिबोनाची सीरीज़ बनाने वाले अंक, यानी 1-1-2-3-5-8-13-21-34, कुछ खास दिनों के अंतराल में बाँटे जाते हैं। तल और छत के बीच खींची गई रेखाओं को फिबोनाची आर्क कहते हैं। अगर कीमत फिबोनाची आर्क के पास ऊपर से आ रही हो, तो उस बिंदु को सपोर्ट माना जाता है। अगर कीमत नीचे से ऊपर की ओर आर्क के पास आ रही हो, तो उस बिंदु को रेजिस्टेंस कहा जाता है।
ट्रेंडलाइन सपोर्ट और रेजिस्टेंस
ट्रेंडलाइन चार्ट पर चढ़ती या गिरती कीमतों की चाल के समानांतर रेखाएँ खींचकर बनाई जाती हैं। जिन बिंदुओं पर ट्रेंडलाइन आपस में मिलती हैं, उनसे सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल दर्शाए जाते हैं। जब नीचे की ओर जाती दो ट्रेंडलाइन आपस में मिलती हैं, तो सपोर्ट बनने की उम्मीद की जाती है। ऊपर की ओर जाती दो ट्रेंडलाइन का मिलना रेजिस्टेंस के तौर पर पढ़ा जाता है।
