ब्लॉकचेन जैसे डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है समय का तालमेल बैठाना। डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम में समय पर सहमति बनानी पड़ती है, और इसी वजह से तरह-तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश बन जाती है। सोलाना ब्लॉकचेन में इस्तेमाल होने वाले Proof of History प्रोटोकॉल से यह तय किया जा सकता है कि कोई ट्रांज़ैक्शन ठीक किस समय हुआ। इस लेख में आपको इसी सवाल का जवाब मिलेगा कि Proof of History क्या है।
Proof of History क्या है?
Proof of History एक ऐसा प्रोटोकॉल है जो यह साबित करने की कोशिश करता है कि ब्लॉकचेन पर हुए ट्रांज़ैक्शन किस क्रम में हैं और वे सही तरीके से आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। यह तरीका सोलाना ब्लॉकचेन नेटवर्क में इस्तेमाल होता है। Proof of History ब्लॉकचेन नेटवर्क की सुरक्षा बनाए रखते हुए उसे तेज़ भी रखता है। सोलाना ब्लॉकचेन के ट्रांज़ैक्शन SHA256 हैश फ़ंक्शन से सुरक्षित किए जाते हैं। PoH पद्धति और सोलाना प्रोटोकॉल की बाकी ख़ास विशेषताओं की बदौलत यह नेटवर्क प्रति सेकंड 50,000 ट्रांज़ैक्शन (TPS - Transactions per second) तक पहुँचता है, और ब्लॉक का समय घटकर सिर्फ़ 400 ms रह जाता है — जबकि बिटकॉइन में यह लगभग 10 मिनट और एथेरियम में 15 सेकंड है।
Proof of History (PoH) कैसे काम करता है?
नेटवर्क को वेरिफ़ाई करने वाले पहले वैलिडेटर को पहला क्रम मिलता है और वह अगला ब्लॉक खोजने में 5 सेकंड लगाता है। दूसरे वैलिडेटर को दूसरा क्रम मिलता है और वह भी अगला ब्लॉक खोजने में 5 सेकंड लगाता है। इस तरह कुल 10 सेकंड बीत जाते हैं। तीसरे वैलिडेटर को तीसरा क्रम मिलता है और वह ब्लॉक खोजने में 5 सेकंड लेता है, यानी कुल मिलाकर 15 सेकंड। हर ब्लॉक में हुए काम को पूरा करने के लिए 5 सेकंड चाहिए। वैलिडेटर एक के बाद एक क्रम में लगते हैं: पिछले वेरिफ़िकेशन के बाद शुरू होने वाली प्रक्रिया को 5 सेकंड इंतज़ार करना पड़ता है। यह पूरा क्रम उन सभी यूज़र्स को दिखता है जो समय का हिसाब जाँचते हैं। अगर चौथा वैलिडेटर होता, तो वह तीसरे वैलिडेटर के 5 सेकंड बाद वेरिफ़िकेशन करता।
Proof of History क्यों ज़रूरी है?
Proof of History पद्धति से ब्लॉकचेन नेटवर्क की देरी कम हो जाती है, जिससे ब्लॉकचेन की कार्यक्षमता बढ़ती है। इस तरीके में ट्रांज़ैक्शन का क्रम पहले ही वेरिफ़ाई हो चुका होता है, इसलिए वेरिफ़िकेशन में लगने वाला समय बच जाता है। नोड्स को यह तय करने में कम वक़्त लगता है कि कौन-सा काम पहले होगा। नतीजा यह कि नेटवर्क से जुड़ने वाले नए वैलिडेटर का चुनाव भी तेज़ी से होता है।
