प्राइस करेक्शन के दौरान क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग रणनीतियाँ

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मार्केट करेक्शन क्या है और निवेशकों को इसके सामने कैसी पोज़िशन लेनी चाहिए?

करेक्शन यानी कीमतों में तेज़ गिरावट — एक ऐसी स्थिति जिसे ट्रेडर क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग बॉट्स की मदद से अपने फ़ायदे में बदल सकते हैं।

करेक्शन की परिभाषा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आम तौर पर यह शब्द किसी एसेट की कीमत में कम से कम 10 से 20 प्रतिशत की तेज़ गिरावट के लिए इस्तेमाल होता है। अगर एसेट इससे ज़्यादा गिरे, तो उस गिरावट को मार्केट क्रैश माना जाता है।

करेक्शन आमतौर पर किसी छोटी वजह का नतीजा होते हैं — जैसे कम ट्रेडिंग वॉल्यूम या दूसरे तकनीकी कारण। इसीलिए ये काफ़ी नियमित रूप से आते हैं और कई दिनों, हफ़्तों और कभी-कभी महीनों तक चलते हैं। "करेक्शन" शब्द इसलिए इस्तेमाल होता है क्योंकि कीमत आमतौर पर अपनी अपेक्षित वैल्यू पर लौट आती है। लेकिन इसका उल्टा भी हो सकता है: करेक्शन एक बड़ी गिरावट — यानी बेयर मार्केट — में बदल सकता है।

जैसा कि ज़्यादातर लोग जानते हैं, क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में कीमतों की वोलैटिलिटी बहुत ज़्यादा होती है। कीमतों का नियमित रूप से ऊपर-नीचे होना यहाँ आम बात है।

सिर्फ़ 2021 में ही क्रिप्टोकरेंसी मार्केट चार बार करेक्शन से गुज़रा।

इसीलिए विश्लेषक निवेशकों को सलाह देते हैं कि एसेट तब ख़रीदें "जब बाकी सब बेच रहे हों", और इस दौर को "ख़रीदारी का शानदार मौक़ा" बताते हैं।

असली दिक्कत यह है कि करेक्शन कब आएगा, यह पहले से पता लगाना मुश्किल है। यहीं पर क्रिप्टो ट्रेडिंग बॉट्स अहम भूमिका निभा सकते हैं: सिग्नल और इंडिकेटर की मदद से वे ट्रेडर्स को यह तय करने में मदद करते हैं कि कब ख़रीदना और कब बेचना है, ताकि स्क्रीन के सामने न होने पर भी कोई मौक़ा हाथ से न निकले।

करेक्शन के दौरान ऑटोमैटिक क्रिप्टो ट्रेडिंग बॉट इस्तेमाल करते समय निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग बॉट भावनाओं को किनारे रख देते हैं, लेकिन वे पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं होते। इसलिए उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए।

करेक्शन के दौर में भावनाएँ हावी हो जाती हैं। हालाँकि ऐसी घटनाएँ अपेक्षित होती हैं, फिर भी निवेशक डर के मारे जल्दबाज़ी में ऐसा ट्रेड कर बैठते हैं जो उनके हित में नहीं होता। इन्हीं वजहों से क्रिप्टो ट्रेडिंग बॉट काम आता है — ट्रेड तर्क के आधार पर होते हैं और भावनाएँ समीकरण से बाहर हो जाती हैं।

लेकिन ट्रेडिंग बॉट को सफलतापूर्वक इस्तेमाल करने के लिए ट्रेडर्स को पहले अपने लिए सबसे फ़ायदेमंद विकल्प चुनना होगा। चुनाव भले ही निवेशक का हो, फ़ैसले लेने की प्रक्रिया यहीं ख़त्म नहीं होती।

ट्रेडिंग बॉट नियमों के एक तय सेट का पालन करने के लिए बनाए जाते हैं। इसीलिए अप्रत्याशित बाज़ार के सामने वे हमेशा परफ़ेक्ट काम नहीं करते। नतीजतन, ऑटोमैटिक ट्रेडिंग बॉट के लिए एक सावधानी से बनाई गई रणनीति ज़रूरी है। प्रोग्रामिंग की गलतियाँ भी क्रिप्टो बॉट्स पर असर डाल सकती हैं। इसलिए बॉट के एक्शन या अपने नियम शुरुआत से तय करते समय ट्रेडर्स को बेहद सावधान रहना चाहिए।

ऑटोमैटिक बॉट से सफलता पाने के लिए निवेशकों को अपने लक्ष्य साफ़ रखने चाहिए, धैर्य रखना चाहिए और अपने सिस्टम पर भरोसा करना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती।

ऑटोमेटेड समाधान इस्तेमाल करते समय निवेशकों को कौन-सा तरीक़ा और रणनीति अपनानी चाहिए?

ऑटोमेटेड ट्रेडिंग रणनीतियाँ — जिनमें डॉलर-कॉस्ट एवरेजिंग (DCA) बॉट और मीन रिवर्ज़न रणनीति शामिल हैं — यूज़र्स को मार्केट करेक्शन को अपने फ़ायदे में बदलने में मदद कर सकती हैं।

मीन रिवर्ज़न रणनीति इस विचार पर आधारित है कि एक निश्चित समय के बाद भाव औसत वैल्यू पर लौट आएँगे, क्योंकि कीमत के सामान्य होने की उम्मीद रहती है। व्यवहार में यह रणनीति कीमत की ऊपरी और निचली सीमा तय करती है। इसके बाद जब कीमत सामान्य दायरे से बाहर जाती है, तो एल्गोरिदम ऑर्डर एग्ज़िक्यूट करता है।

यह रणनीति तब उपयोगी होती है जब कीमतें नए उच्च या निम्न स्तर छूती हैं। इस तरह निवेशक बाज़ार के ट्रेंड से मुनाफ़ा कमा सकते हैं। इस रणनीति के साथ क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग बॉट इस्तेमाल करते समय ट्रेडर्स को ध्यान रखना चाहिए कि कीमतें हमेशा उम्मीद जितनी जल्दी नहीं पलटतीं।

करेक्शन के समय ऑटो ट्रेडिंग कैसे करें?

ऑटोमैटिक ट्रेडिंग का फ़ायदा उठाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक प्लेटफ़ॉर्म चुनें, अपनी रणनीति तय करें और उसे लागू करना शुरू करें।

ऑटोमेटेड ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, यूज़र्स के पास आज नए और अनुभवी दोनों तरह के ट्रेडर्स के लिए बने कई विकल्प मौजूद हैं।

HafizeBot एक क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग बॉट है जो यूज़र्स को ऑटोमेटेड ट्रेडिंग रणनीतियों का फ़ायदा उठाने देता है। ट्रेड मशीन लर्निंग से प्रशिक्षित न्यूरल नेटवर्क के आधार पर बाज़ार की चाल के अनुसार एग्ज़िक्यूट होते हैं, जिसमें DCA और ग्रिड रणनीतियों के साथ-साथ स्टॉप-लॉस जैसे और भी फ़ीचर उपलब्ध हैं।