FOMO क्या है?

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जब क्रिप्टोकरेंसी ने निवेश बाज़ार में अपनी जगह बनानी शुरू की, तो कई नए शब्द हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गए। इन्हीं में से एक है “FOMO”, जो इस क्षेत्र में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में गिना जाता है। इसकी जड़ मनोविज्ञान में है और यह अंग्रेज़ी के “fear of missing out” यानी कुछ छूट जाने के डर का संक्षिप्त रूप है। आमतौर पर यह भावना सोशल मीडिया के आदी लोगों के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसे हमारे दौर की सबसे आम मानसिक स्थिति कहा जाता है। शाब्दिक अर्थ में FOMO को किसी घटनाक्रम से चूक जाने या किसी स्थिति से वंचित रह जाने के डर के रूप में समझा जा सकता है। यही वजह है कि लोग अपने रिश्तों को हमेशा ताज़ा बनाए रखना चाहते हैं। चूँकि माना जाता है कि यह भावना मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक योगदान देती है, इसलिए इसे एक मनोवैज्ञानिक ज़रूरत के तौर पर स्वीकार किया गया है। इसे किसी स्थिति से व्यक्ति के मानसिक जुड़ाव और फिर उससे मुक्त होने की राहत के रूप में समझाया जा सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी और FOMO का रिश्ता

क्रिप्टो निवेश में निवेशक को तर्क के आधार पर फ़ैसला लेना चाहिए। लेकिन ठंडे दिमाग़ से सोचने के बजाय कई निवेशक FOMO के आवेग में आकर अपने निवेश की दिशा तय कर लेते हैं। क्रिप्टो बाज़ार में यह मौके छूट जाने के डर के रूप में सामने आता है। यह रिश्ता — यानी मौकों को पहचान न पाना, या जिन मौकों से दूसरे निवेशक कमा रहे हैं उनका फ़ायदा न उठा पाना — कई बार निवेशक से ग़लत फ़ैसले तक करा देता है। इसीलिए FOMO के असर में लिया गया फ़ैसला इतना ख़तरनाक होता है कि बेहद जोखिम भरी स्थिति पैदा कर सकता है। बेवक्त किए गए निवेशों के पीछे आमतौर पर भावनाओं से चलने वाले फ़ैसले ही होते हैं।

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