Delist का मतलब क्या होता है?

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किसी फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट को उस प्लेटफॉर्म से हटा देने की प्रक्रिया को डीलिस्टिंग कहा जाता है, जहाँ वह लिस्टेड है। जो एसेट डीलिस्ट हो जाता है, उसकी ट्रेडिंग उन्हीं प्लेटफॉर्म पर बंद हो जाती है जिन्होंने उसे हटाया है। ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को यह अधिकार होता है कि वे अपने यहाँ लिस्ट किए गए एसेट को कभी भी डीलिस्ट कर दें। डीलिस्टिंग कई वजहों से हो सकती है, जिनमें सबसे आम हैं भरोसे की कमी, ऊँची लागत और कम वॉल्यूम।

डीलिस्ट हुए एसेट और क्रिप्टोकरेंसी का क्या होता है?

किसी क्रिप्टो एसेट को डीलिस्ट करने का फैसला हर प्लेटफॉर्म अपने स्तर पर, स्वतंत्र रूप से लेता है। जब कोई क्रिप्टोकरेंसी किसी एक एक्सचेंज से हटाई जाती है, तो बाकी एक्सचेंजों से वह अपने आप नहीं हटती जहाँ वह लिस्टेड है। डीलिस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे हर प्लेटफॉर्म दूसरों से अलग, अपने हिसाब से पूरा करता है। जिस एक्सचेंज से कोई क्रिप्टोकरेंसी डीलिस्ट हुई है, वहाँ से उसे किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया जा सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी को डीलिस्ट क्यों किया जाता है?

क्रिप्टोकरेंसी तब डीलिस्ट की जाती है जब वह उस प्लेटफॉर्म की शर्तें पूरी नहीं कर पाती जहाँ वह लिस्टेड है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। जो कॉइन तेज उतार-चढ़ाव के बाद अपने पुराने स्तर पर वापस नहीं लौट पाते, वे निवेशकों के बीच अविश्वास पैदा करते हैं। इससे यूजर ट्रेडिंग में उस कॉइन को कम तवज्जो देते हैं और उसका वॉल्यूम नीचे बना रहता है। ऐसी स्थिति में प्लेटफॉर्म उस क्रिप्टो एसेट को ट्रेडिंग से हटाने का फैसला ले सकते हैं। इसके अलावा, जब प्रोजेक्ट बनाने वाली टीम यूजर्स और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से किए गए वादे पूरे नहीं करती, या प्रोजेक्ट के संचालन में दिक्कतें आने लगती हैं, तब भी डीलिस्टिंग हो सकती है।