ब्लॉकचेन तकनीक की बदौलत अस्तित्व में आए विकेंद्रीकृत ऐप्लिकेशन आखिर हैं क्या और वे कैसे काम करते हैं?
DApp क्या है? विकेंद्रीकृत ऐप कैसे काम करता है?
ऐसा सॉफ़्टवेयर जिसका कोई केंद्र नहीं होता और जो किसी भी संस्था या व्यक्ति से स्वतंत्र होकर चलता है, विकेंद्रीकृत ऐप्लिकेशन (DApp) कहलाता है। विकेंद्रीकृत सॉफ़्टवेयर ब्लॉकचेन पर या पीयर-टू-पीयर (P2P) नेटवर्क पर चल सकता है।
किसी के नियंत्रण के बिना खुद-ब-खुद चलने वाले DApp सिस्टम बनाने का मकसद यह है कि लेन-देन पर तीसरे पक्ष यानी बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं का असर घटाया जा सके। पारंपरिक ऐप्लिकेशन के उलट यह सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ता और सेवा देने वाले के बीच बिना किसी बिचौलिये के सीधा पुल बनाता है।
विकेंद्रीकृत ऐप्स के फायदे
जिन ब्लॉकचेन-आधारित DApp समाधानों को कोई एक अथॉरिटी नहीं चलाती और जो विकेंद्रीकृत होते हैं, वे सेंसरशिप से सुरक्षा देते हैं। लेन-देन के बीच में रुक जाने की आशंका बहुत कम रहती है। नेटवर्क को प्रोसेसिंग पावर देने वालों में से कुछ को तकनीकी दिक्कत आ भी जाए, तो लेन-देन बाकी प्रदाताओं के जरिए चलते रहते हैं।
ब्लॉकचेन पर बने विकेंद्रीकृत ऐप्लिकेशन क्रिप्टोकरेंसी को सीधे सपोर्ट करते हैं। लेन-देन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता, क्योंकि जुड़ा हुआ हर उपयोगकर्ता खुद नेटवर्क को सहारा देता है।
ओपन सोर्स ढाँचे की वजह से डेवलपर एक-दूसरे से मदद और सहयोग लेकर ज्यादा कारगर ऐप्लिकेशन बना पाते हैं। इसके अलावा ये सर्वर पर टिके पारंपरिक केंद्रीकृत ऐप्लिकेशन के मुकाबले साइबर हमलों के सामने ज्यादा टिकाऊ होते हैं। DApp इकोसिस्टम में भुगतान और पहचान-सत्यापन, दोनों प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने की क्षमता है।
कोड का ओपन सोर्स होना और लेन-देन का सबको दिखने वाले रूप में दर्ज होना भरोसा बनाता है। नेटवर्क की सुरक्षा के लिए सारा डेटा एन्क्रिप्ट किया जाता है, इसलिए विकेंद्रीकृत ऐप्लिकेशन में लेन-देन की सच्चाई जाँची जा सकने के बावजूद उनमें मौजूद संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रूप से संग्रहीत रहती है।
विकेंद्रीकृत ऐप्स के नुकसान
DApp परियोजनाओं का ओपन सोर्स ढाँचा फायदेमंद जरूर है, पर इसके नुकसान भी हैं। बुरी नीयत वाले लोग सबके लिए खुले कोड में दिखने वाली कमजोरियों का फायदा उठाकर हमला कर सकते हैं।
दूसरी ओर, कम उपयोगकर्ताओं वाली परियोजनाएँ असुरक्षित हो जाती हैं, क्योंकि DApp नेटवर्क की ताकत उसके उपयोगकर्ताओं से ही आती है। नेटवर्क से जितने ज्यादा उपयोगकर्ता जुड़ेंगे, नेटवर्क की सुरक्षा उतनी ही मजबूत होगी।
