डायरेक्टेड एसाइक्लिक ग्राफ, यानी DAG, डेटा को मॉडल करने और व्यवस्थित करने का एक तरीका है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी में होता है।
ब्लॉकचेन ब्लॉक्स से बनता है, जबकि डायरेक्टेड एसाइक्लिक ग्राफ में वर्टेक्स (शीर्ष) और एज (किनारे) होते हैं। इसलिए यहाँ क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन वर्टेक्स के रूप में दर्ज होते हैं और एक के ऊपर एक जुड़ते जाते हैं। हाँ, ब्लॉकचेन की तरह ही ट्रांज़ैक्शन DAG तक नोड्स के ज़रिए ही पहुँचते हैं। ट्रांज़ैक्शन भेजने के लिए नोड को प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) का काम पूरा करना होता है।
सीधे शब्दों में कहें तो ब्लॉकचेन सिस्टम एक चेन जैसा दिखता है, जबकि DAG का सिस्टम ग्राफ जैसा लगता है। डेटा स्टोरेज और ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन प्रोसेसिंग में अपनी दक्षता के चलते DAG मॉडल को इंडस्ट्री में आगे चलकर ब्लॉकचेन के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
DAG मॉडल को क्रिप्टो में विकेंद्रीकरण की मौजूदा समस्या का संभावित हल भी माना जाता है। इस मॉडल में माइनर्स को चेन में जुड़ने वाले नए ब्लॉक्स के लिए आपस में होड़ नहीं करनी पड़ती।
चूँकि नोड्स एक साथ बनते हैं, इसलिए ट्रांज़ैक्शन भी तेज़ी से प्रोसेस हो सकते हैं। डेवलपर्स DAG को एक बेहतर और ज़्यादा सुरक्षित समाधान मानते हैं, जो नेटवर्क के स्केलेबल होते ही उसकी उपयोगिता बढ़ा सकता है।
DAG कैसे काम करता है?
जैसा कि बताया गया, डायरेक्टेड एसाइक्लिक ग्राफ डेटा स्टोरेज में ज़्यादा कारगर है। इसका ढाँचा पेड़ जैसा होता है, जिसमें आपस में जुड़े नोड्स 'शाखाओं' का काम करते हैं।
चूँकि हर वर्टेक्स के एक से ज़्यादा पैरेंट रूट हो सकते हैं, इसलिए यह मॉडल एक साथ ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन मंज़ूर करने देता है। वजह यह है कि यूज़र्स को अगला ट्रांज़ैक्शन शुरू करने के लिए पिछले के पूरा होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
तो डायरेक्टेड एसाइक्लिक ग्राफ में हर नए ट्रांज़ैक्शन को नेटवर्क द्वारा स्वीकार किए जाने से पहले पिछले ट्रांज़ैक्शन को रेफ़र करना होता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे ब्लॉकचेन के ब्लॉक पिछले ब्लॉक्स को रेफ़र करते हैं। इसके पीछे सोच यह है कि कोई ट्रांज़ैक्शन तभी सचमुच पुष्ट माना जाता है जब कोई दूसरा ट्रांज़ैक्शन उसे रेफ़र करे, और यह सिलसिला चलता रहता है।
DAG में हर वर्टेक्स एक ट्रांज़ैक्शन को दर्शाता है। यहाँ ब्लॉक नहीं होते, इसलिए माइनिंग की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। ट्रांज़ैक्शन ब्लॉक्स में इकट्ठा होने के बजाय एक के ऊपर एक बनते जाते हैं। इसके बाद, जैसा अभी बताया, जब भी कोई नोड ट्रांज़ैक्शन भेजता है तो पिछले ट्रांज़ैक्शन को मंज़ूरी देने और स्पैम रोकने के लिए प्रूफ-ऑफ-वर्क का काम किया जाता है।
DAG आधारित क्रिप्टोकरेंसी में आम तौर पर नए ट्रांज़ैक्शन पुराने ट्रांज़ैक्शन के ऊपर बनते हैं। ब्लॉकचेन से मुख्य फ़र्क यह है कि DAG में एक बार में सिर्फ़ एक नहीं, बल्कि कई ट्रांज़ैक्शन को रेफ़र किया जा सकता है।
कुछ सिस्टम में एक ऐसा एल्गोरिदम होता है जो जमा हुए वेट (यानी किसी सिरे तक पहुँचने वाले कन्फ़र्मेशन की संख्या) के आधार पर तय करता है कि किन 'टिप्स' या ट्रांज़ैक्शन पर आगे निर्माण करना है।
DAG में डबल-स्पेंड से सुरक्षा इस तरह काम करती है कि नोड्स DAG के पहले ट्रांज़ैक्शन तक जाने वाले रास्ते की जाँच करके पुराने ट्रांज़ैक्शन की पुष्टि करते हैं। इससे पता चलता है कि भेजने वाले के पास पर्याप्त बैलेंस है या नहीं। अगर कोई यूज़र किसी अमान्य रास्ते पर निर्माण करता है, तो उस ट्रांज़ैक्शन के नज़रअंदाज़ हो जाने का ख़तरा रहता है।
अलग-अलग रास्तों से पैदा होने वाले टकराव एक चयन एल्गोरिदम से सुलझाए जाते हैं, जो ज़्यादा जमा वेट वाले सिरों को तरजीह देता है।
DAG का इस्तेमाल किसलिए होता है?
DAG मॉडल ब्लॉकचेन तकनीक की दो मानी हुई कमज़ोरियों — विकेंद्रीकरण और स्केलेबिलिटी — को दूर करने की कोशिश करता है। साथ ही यह सुरक्षा और इस्तेमाल में आसानी भी बेहतर करना चाहता है।
किस तरह?
- बिटकॉइन ब्लॉकचेन या एथेरियम प्लेटफ़ॉर्म पर माइनर्स एक बार में सिर्फ़ एक ही ब्लॉक बना सकते हैं। इसलिए नए ट्रांज़ैक्शन तभी मंज़ूर होते हैं जब पिछला ब्लॉक पूरा हो जाए। DAG मॉडल इन ब्लॉक्स को हटा देता है और ट्रांज़ैक्शन सीधे लेजर में जोड़ देता है।
ब्लॉक्स हटने से DAG मॉडल को माइनिंग की ज़रूरत नहीं रहती। इसका मतलब है कि नेटवर्क चलाने में कम बिजली लगती है। DAG के कुछ और फ़ायदे भी हैं, जैसे:
- ब्लॉक बनने की रफ़्तार से बंधी हुई नहीं, बल्कि तेज़ ट्रांज़ैक्शन स्पीड
- माइनर्स नहीं तो ट्रांज़ैक्शन फ़ीस भी नहीं
- माइनिंग की तुलना में कम ऊर्जा खपत और पर्यावरण को फ़ायदा
फ़िलहाल क्रिप्टो में DAG का इस्तेमाल अभी शुरुआती दौर में ही है। ब्लॉकचेन के उलट ये अभी पूरी तरह विकेंद्रीकृत नहीं हैं। इसीलिए इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से नेटवर्क शुरू करने में होता है, अभी ऐसे सिस्टम के तौर पर नहीं जिस पर स्थिर नेटवर्क खड़ा किया जा सके।
कौन-सी क्रिप्टोकरेंसी DAG इस्तेमाल करती हैं?
एक ज़माने में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ब्लॉकचेन के बिना सोचना नामुमकिन था। लेकिन DAG मॉडल के साथ कई क्रिप्टोकरेंसी इस तकनीक पर सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी हैं।
कुछ उदाहरण हैं Obyte, IOTA और Nano। अभी अपेक्षाकृत नया होने के बावजूद DAG ढाँचा ज़बरदस्त संभावनाएँ दिखाता है। जैसा बताया गया, कई प्रोजेक्ट इसे सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर चुके हैं। सबसे चर्चित ये हैं:
Obyte
Obyte, जिसे पहले ByteBall कहा जाता था, एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है जो DAG ढाँचा लागू करके ब्लॉकचेन से पूरी तरह स्वतंत्र है। फिर भी Obyte के ट्रांज़ैक्शन पर फ़ीस लगती है।
इसकी वजह यह है कि Obyte नेटवर्क एक वैलिडेटर सिस्टम इस्तेमाल करता है, जिससे ट्रांज़ैक्शन की दोहरी जाँच होती है। यह गवाहों (witnesses) पर आधारित कंसेंसस एल्गोरिदम अपनाता है। ये गवाह भरोसेमंद और प्रतिष्ठित यूज़र होते हैं जो वैलिडेटर की भूमिका निभाते हैं।
Obyte बिना ट्रेस वाले ट्रांज़ैक्शन और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का भी समर्थन करता है।
IOTA
इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स एप्लिकेशन के लिए बनी IOTA ने अपना 'ब्लॉक रहित ब्लॉकचेन' नेटवर्क 2016 में शुरू किया। IOTA के पीछे विचार यह है कि सभी यूज़र व्यावहारिक रूप से माइनर बन जाएँ। मिसाल के तौर पर, एक ट्रांज़ैक्शन मंज़ूर कराने के लिए यूज़र को दो ट्रांज़ैक्शन वेरिफ़ाई करने होते हैं।
IOTA नोड्स और टैंगल्स (नोड्स के समूह) से बने नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जो मंज़ूरी की प्रक्रिया को तेज़ और ज़्यादा कारगर बनाते हैं।
सभी यूज़र नेटवर्क के रखरखाव के लिए थोड़ी-थोड़ी पावर देते हैं और सभी कंसेंसस में भी हिस्सा लेते हैं। इससे नेटवर्क एक ही समय में बेहद विकेंद्रीकृत और स्केलेबल रह पाता है।
ट्रांज़ैक्शन पर लगभग कोई शुल्क नहीं लगता; इसीलिए IOTA को माइक्रो पेमेंट के लिए किफ़ायती वैकल्पिक क्रिप्टोकरेंसी माना जाता है।
Nano
Nano भी DAG सिस्टम पर चलने वाली क्रिप्टोकरेंसी है। Nano में नोड्स से जुड़ी हुई स्वतंत्र ब्लॉकचेन होती हैं, जिसे ब्लॉक-लैटिस तकनीक कहा जाता है। दरअसल यह DAG और ब्लॉकचेन का मिश्रण है।
हर यूज़र का अपना वॉलेट और अपनी ब्लॉकचेन होती है। अपने वॉलेट या ब्लॉकचेन में बदलाव सिर्फ़ वही यूज़र कर सकता है। ट्रांज़ैक्शन तब पूरा होता है जब भेजने वाला और पाने वाला, दोनों अपनी-अपनी ब्लॉकचेन पर अपनी प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं।
Nano अपने यूज़र्स को शून्य ट्रांज़ैक्शन फ़ीस के साथ-साथ तेज़ ट्रांज़ैक्शन स्पीड भी देता है।
ब्लॉकचेन में DAG की भूमिका क्या है?
DAG को ब्लॉकचेन का एक उपयुक्त विकल्प माना जा सकता है, हालाँकि इसमें अभी और सुधार की गुंजाइश है। DAG मॉडल ब्लॉकचेन तकनीक की आम दिक्कतों — लागत, रफ़्तार और अनुकूलनशीलता — को हल करना चाहता है।
दरअसल दोनों ही तकनीकें ट्रांज़ैक्शन को एक डिजिटल लेजर में दर्ज करती हैं और एक ही लक्ष्य की ओर काम करती हैं। इनके बीच फ़र्क मुख्य रूप से उस ढाँचे का है जिसे हर मॉडल डेटा स्टोर करने के लिए अपनाता है।
DAG बनाम ब्लॉकचेन
ब्लॉकचेन और DAG, दोनों ट्रांज़ैक्शन को एक वितरित लेजर में दर्ज करते हैं, लेकिन अलग-अलग तरीक़ों से।
नीचे फ़ायदों और नुक़सानों के लिहाज़ से दोनों की एक त्वरित तुलना दी गई है:
DAG के फ़ायदे
- माइक्रोट्रांज़ैक्शन और बड़े ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम के लिए उपयुक्त
- माइनिंग हार्डवेयर की ज़रूरत ख़त्म कर देता है
- फ़ीस काफ़ी कम हो सकती है
- ऊर्जा की खपत कम
DAG के नुक़सान
- ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम कम होने के कारण हमलों के प्रति संवेदनशील
- अभी शुरुआती दौर में; उल्लेखनीय स्तर का विकेंद्रीकरण हासिल नहीं कर पाया है
ब्लॉकचेन के फ़ायदे
- स्थापित तकनीक, जिसे बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी व्यापक रूप से इस्तेमाल करती हैं
- पारदर्शी और अपरिवर्तनीय, बेहद सुरक्षित
- बड़ी रक़म वाले ट्रांज़ैक्शन के लिए किफ़ायती
ब्लॉकचेन के नुक़सान
- स्टोरेज और नेटवर्क बैंडविड्थ की भारी ज़रूरत
- बहुत ज़्यादा बिजली की खपत
- ऊँची ट्रांज़ैक्शन फ़ीस
आख़िरकार कौन-सा मॉडल चुनना है, यह आपके कारोबारी लक्ष्यों पर निर्भर करता है। जैसा हमने देखा, हर मॉडल की अपनी ख़ूबियाँ और कमज़ोरियाँ हैं, और आपकी ज़रूरतों के हिसाब से कोई एक ज़्यादा उपयुक्त हो सकता है।
