मर्कल ट्री क्या है?

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मर्कल ट्री कंप्यूटर साइंस और क्रिप्टोग्राफी में इस्तेमाल होने वाला एक डेटा स्ट्रक्चर है। क्रिप्टो मार्केट में मर्कल ट्री से मतलब उस डेटा स्ट्रक्चर से है, जिसमें ब्लॉकचेन पर हैश फंक्शन के ज़रिए हुए ट्रांज़ैक्शन का सारांश रखा जाता है। मर्कल ट्री की मदद से ब्लॉकचेन के ट्रांज़ैक्शन ब्लॉक को आसानी और कुशलता से वेरिफ़ाई किया जा सकता है। इस लेख में आपको मर्कल ट्री क्या है, इस सवाल का जवाब मिलेगा।

मर्कल ट्री की खोज राल्फ मर्कल ने की थी। उन्होंने 1979 में इस कॉन्सेप्ट का पेटेंट कराया और 1987 में छपे अपने पेपर "पारंपरिक एन्क्रिप्शन फंक्शन पर आधारित डिजिटल सिग्नेचर" में मर्कल ट्री की अवधारणा का ज़िक्र किया। मर्कल ट्री एक स्कीमा जैसा दिखने वाला डेटा स्ट्रक्चर है, जो हैश वैल्यू से बनता है। इसमें डेटा के हैश कोड नीचे से ऊपर की ओर एक स्कीमा में सजाए जाते हैं। नीचे वाली पंक्ति के हैश को आपस में जोड़ने से ऊपर वाले हैश की वैल्यू तय होती है।

सिस्टम में मौजूद डेटा की इंटीग्रिटी इसी तरह सुरक्षित रहती है – हैश वैल्यू एक स्कीमा में क्रम से रखी जाती हैं और नीचे से ऊपर की ओर सिलसिलेवार जोड़ी जाती हैं। इस स्ट्रक्चर का इस्तेमाल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक होने वाले डेटा ट्रांसफ़र में, पीयर-टू-पीयर नेटवर्क में और ट्रांसफ़र किए गए डेटा की जाँच में होता है। मर्कल ट्री से यह पता लगाया जा सकता है कि भेजा गया डेटा या डेटा ब्लॉक कहीं ख़राब या नकली तो नहीं है। इन ब्लॉक की सच्चाई भी मर्कल ट्री से ही पक्की होती है।

मर्कल ट्री कैसे काम करता है?

मर्कल ट्री ब्लॉक में मौजूद हैश वैल्यू से बनता है। मर्कल ट्री के सबसे नीचे ट्रांज़ैक्शन डेटा होता है। हैश फंक्शन चलाकर इस डेटा की हैश वैल्यू (हैश कोड) निकाली जाती है। इसके बाद स्कीमा के नीचे वाली वैल्यू को आपस में जोड़ा जाता है और जो नतीजा मिलता है उसे ऊपर की पंक्तियों में जोड़ दिया जाता है। यही प्रक्रिया दोहराते-दोहराते पूरा मर्कल ट्री तैयार हो जाता है। प्रक्रिया के आख़िर में स्कीमा के सबसे ऊपर मौजूद हैश वैल्यू को रूट हैश या मर्कल रूट कहा जाता है। निकाली गई रूट हैश वैल्यू बताती है कि ब्लॉक में कोई गड़बड़ी है या नहीं। अगर रूट हैश बनाने वाली वैल्यू में कोई मेल न बैठे, तो सिस्टम का एल्गोरिदम तब तक हैश फंक्शन के साथ काम करता रहता है, जब तक बिना गड़बड़ी वाला मर्कल रूट न बन जाए।

बिटकॉइन में मर्कल ट्री क्यों इस्तेमाल होता है?

क्योंकि यह उन माइनर्स का काम आसान कर देता है, जो बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर ब्लॉक वेरिफ़ाई करना चाहते हैं। बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर माइनर्स हैश फंक्शन चलाकर ब्लॉक वेरिफ़ाई करते हैं। बिटकॉइन ब्लॉकचेन में डेटा को क्रम से लगाकर मर्कल ट्री में रखा जाता है, फिर एल्गोरिदम के हैश फंक्शन चलकर रूट हैश निकालते हैं। इस तरह मिला रूट हैश आगे की माइनिंग प्रक्रियाओं में भी काम आता है। इससे माइनर्स सारे ब्लॉक की हैशिंग करने के बजाय सिर्फ़ रूट हैश की हैशिंग करके अपना काम आगे बढ़ा सकते हैं। मर्कल ट्री बिटकॉइन के अलावा दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की ब्लॉकचेन पर भी ऐसे ही समाधान देता है।

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