क्रिप्टोकरेंसी अपनी ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव भरी चाल के लिए जानी जाती है — कीमतें कुछ मिनटों के भीतर ही तेज़ी से बदल सकती हैं। इसके साथ ही निवेशक दुनिया में कहीं से भी और दिन के किसी भी समय क्रिप्टो ट्रेडिंग कर सकते हैं। ये दोनों बातें मिलकर इंसान द्वारा की जाने वाली क्रिप्टो ट्रेडिंग की क्षमता को कई तरह से सीमित कर देती हैं।
पहला, ज़्यादातर मामलों में ट्रेडर कीमतों में होने वाले बदलाव पर इतनी तेज़ी से प्रतिक्रिया नहीं दे पाते कि वे बेहतरीन ट्रेड पकड़ सकें, जो सैद्धांतिक रूप से उनके सामने मौजूद होते हैं। एक्सचेंज पर होने वाली देरी और ऑर्डर एग्ज़ीक्यूशन का समय इस समस्या को और बढ़ा देता है। दूसरा, निवेशक सबसे अच्छे ट्रेड पाने के लिए क्रिप्टो बाज़ार को हमेशा उतना समय नहीं दे पाते जितना ज़रूरी है। इसके लिए दुनिया भर के क्रिप्टो एक्सचेंज पर 24 घंटे नज़र रखनी पड़ती।
अच्छी बात यह है कि कई निवेशकों के लिए इन समस्याओं का समाधान मौजूद है। इनमें सबसे प्रमुख हैं बॉट, यानी ऐसे ऑटोमेटेड टूल जो निवेशक की ओर से ट्रेड करते और ऑर्डर पूरे करते हैं। बेशक, बॉट बाज़ार का एक विवादित हिस्सा हैं — इन्हें इस्तेमाल करने के जितने कारण हैं, इन्हें पूरी तरह हटा देने के भी उतने ही तर्क हैं।
- ट्रेडर बॉट का इस्तेमाल दुनिया भर में 24/7 चलने वाले क्रिप्टो बाज़ार का फ़ायदा उठाने के लिए करते हैं।
- ट्रेडर के मुकाबले बॉट का फ़ायदा यह है कि वे कहीं ज़्यादा तेज़ी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
- वहीं ज़्यादातर ट्रेडर के पास सबसे अच्छे ट्रेड पकड़ने का समय हमेशा नहीं होता — यह काम बॉट कर सकते हैं।
- एक अहम किस्म है आर्बिट्राज बॉट, जो एक्सचेंज के बीच कीमतों के अंतर का फ़ायदा उठाने की कोशिश करता है।
बॉट के प्रकार
क्रिप्टोकरेंसी बॉट कई तरह के होते हैं। सबसे लोकप्रिय किस्मों में एक है आर्बिट्राज बॉट। आर्बिट्राज बॉट ऐसे टूल हैं जो अलग-अलग एक्सचेंज की कीमतों की जाँच करते हैं और उनके बीच के अंतर का फ़ायदा उठाने के लिए ट्रेड करते हैं। चूँकि Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत एक्सचेंज दर एक्सचेंज अलग होती है, इसलिए पर्याप्त तेज़ बॉट उन एक्सचेंज से आगे निकल सकते हैं जो अपनी कीमतें देर से अपडेट करते हैं।
दूसरी तरह के बॉट अपनी ट्रेडिंग रणनीति परखने के लिए पुराने प्राइस डेटा का इस्तेमाल करते हैं और सैद्धांतिक रूप से ट्रेडर को सहारा देते हैं। कुछ बॉट ऐसे भी होते हैं जिन्हें कीमत या ट्रेडिंग वॉल्यूम जैसे तय सिग्नल पर ट्रेड करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है।
बॉट कैसे काम करते हैं
निवेशक क्रिप्टो ट्रेडिंग में मदद के लिए मुफ़्त बॉट प्रोग्राम से जुड़ सकते हैं। दूसरी ओर, कई बॉट के लिए यूज़र फ़ीस देनी पड़ती है, जो कुछ मामलों में काफ़ी ज़्यादा हो सकती है। आम तौर पर निवेशक वह बॉट या बॉट्स चुनते हैं जो उनके लिए सबसे उपयोगी हों, और फिर डेवलपर से कोड डाउनलोड कर लेते हैं। हर बॉट की सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर संबंधी ज़रूरतें अलग होती हैं।
बॉट बेहद मददगार हो सकते हैं, लेकिन इस पर बहस अब भी जारी है कि क्रिप्टो ट्रेडिंग में इनकी इजाज़त होनी भी चाहिए या नहीं। बॉट से पूरा फ़ायदा उठाने के लिए निवेशक को यह पता होना चाहिए कि इस टूल का सबसे अच्छा इस्तेमाल कैसे किया जाए। मिसाल के तौर पर, निवेशक के पास डिजिटल करेंसी एक्सचेंज पर सही अकाउंट होने चाहिए।
इन अकाउंट में क्रिप्टो होल्डिंग भी डालनी होती है। कई मामलों में निवेश के फ़ैसले — कब खरीदना है और कब बेचना है — उन्हें खुद लेने पड़ते हैं। जो निवेशक सफलता के लिए ज़रूरी समय और मेहनत लगाना नहीं चाहता, उसके लिए क्रिप्टो बॉट रातोंरात अमीर बनने का रास्ता नहीं है।
बॉट ऑर्डर पूरे करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे एक मज़बूत निवेश रणनीति की जगह नहीं ले सकते।
क्रिप्टो बॉट इस्तेमाल करने के नुकसान
क्रिप्टो बॉट से जुड़ी दिक्कतों की बात करें तो पहली यह कि कई बॉट सही तरीके से काम करने पर भी बहुत मामूली रिटर्न ही देते हैं। दूसरी, कई बॉट अच्छे डिज़ाइन किए ही नहीं गए होते।
निवेशकों को याद रखना चाहिए कि क्रिप्टो बॉट का क्षेत्र उतना ही अनियंत्रित है जितनी खुद क्रिप्टो की दुनिया — शायद उससे भी ज़्यादा।
तीसरी और सबसे अहम बात, बॉट का सफल इस्तेमाल डिजिटल करेंसी बाज़ार की गहरी समझ और एक बेहतरीन निवेश योजना की माँग करता है। कुछ ट्रेडर के लिए बॉट क्रिप्टो ट्रेडिंग में काम का साधन साबित हो सकता है। वहीं कुछ के लिए, जब वे बॉट को ठीक से इस्तेमाल करने लायक तैयारी पूरी कर लेते हैं, तब शायद उन्हें उसकी ज़रूरत ही न रह जाए।
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